गोंडा में बेरोजगारी के खिलाफ युवाओं का घर छोड़ो सत्याग्रह:डिग्रियां हाथ में लेकर सड़कों पर बैठे, बोले- रोजगार का ठोस समाधान होने तक नहीं लौटेंगे


गोंडा में बेरोजगारी और रोजगार के अवसरों को लेकर युवाओं का विरोध प्रदर्शन गुरुवार देर रात सड़कों तक पहुंच गया। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, लखनऊ से शुरू हुआ Gen-Z का ‘घर छोड़ो सत्याग्रह’ अब गोंडा जिले के ग्रामीण इलाकों में भी पहुंच गया है। गुरुवार रात करीब 11:40 बजे से खोरहंसा बाजार, मल्लापुर बाजार और कटौली चौराहे पर कई शिक्षित युवा घर-परिवार छोड़कर धरने पर बैठे। युवाओं ने मोमबत्ती जलाकर हाथों में अपनी डिग्रियां और रोजगार से जुड़े सवालों वाली तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया। धरने पर बैठे युवाओं के हाथों में ‘घर के ताने समाज की गाली, दूर करो ये बेरोजगारी’ जैसे संदेश लिखी तख्तियां थीं। प्रदर्शनकारियों ने रोजगार और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर प्रशासन और सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की। युवाओं का कहना है कि शिक्षा हासिल करने के बाद भी रोजगार नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के बाद भी रोजगार नहीं मिलने का दावा गोंडा में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे विपनेश यादव ने कहा कि कई युवाओं ने वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की और उच्च शिक्षा हासिल की, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सुरक्षित रोजगार नहीं मिल सका। उनके मुताबिक, पेपर लीक, रुकी हुई भर्तियों और परिणामों में देरी से युवाओं की उम्मीदों को झटका लगा है। विपनेश यादव ने कहा, “माता-पिता ने कर्ज लेकर और पेट काटकर हमें पढ़ाया-लिखाया, लेकिन इस उम्र में भी हम उन्हीं पर आर्थिक रूप से निर्भर हैं। घर पर रहकर लाचारी का बोझ बनने से बेहतर हमने सत्याग्रह का रास्ता चुनना समझा।” रोजगार और भर्ती प्रक्रिया में समाधान की मांग आंदोलन से जुड़े युवाओं का कहना है कि जब तक रोजगार और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर पारदर्शी और ठोस समाधान सामने नहीं आता, तब तक वे अपने आंदोलन को जारी रखेंगे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका मुख्य मुद्दा रोजगार और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं का समाधान है। युवाओं ने कहा- अधिकारों और रोजगार के सवाल से पीछे नहीं हटेंगे आंदोलन से जुड़े छात्रों ने कहा कि समाज की ओर से जो भोजन मिलेगा, वे उसे स्वीकार करेंगे और जरूरत पड़ने पर भूखे भी सो जाएंगे, लेकिन रोजगार और अपने अधिकारों के सवाल से पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि घर छोड़कर सत्याग्रह करने का फैसला बेरोजगारी को लेकर अपनी स्थिति और मांगों को सामने रखने के लिए किया गया है। ग्रामीण और व्यापारी वर्ग से मदद मिलने का दावा प्रदर्शनकारियों के अनुसार, यह मुहिम लखनऊ से शुरू होकर गोंडा सहित पूर्वांचल और अवध के कई जिलों तक पहुंच रही है। गोंडा में स्थानीय स्तर पर भी लोगों का समर्थन मिलने का दावा किया गया है। आसपास के ग्रामीण और व्यापारी वर्ग के लोग धरने पर बैठे युवाओं के लिए भोजन-पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। कुछ लोग धरने में शामिल होकर युवाओं का समर्थन भी कर रहे हैं।

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