योगेश सोमवंशी | लखनऊ3 मिनट पहले
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हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने फैसला सुनाया है कि आरक्षित वर्ग के जो अभ्यर्थी अपने अंकों के आधार पर सामान्य वर्ग की मेरिट में आते हैं, उन्हें अंतिम चयन तक इंतजार नहीं कराया जा सकता। ऐसे अभ्यर्थियों को स्क्रीनिंग परीक्षा के स्तर पर ही सामान्य वर्ग में शामिल किया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने भावना यादव व छह अन्य की अपील मंजूर करते हुए यूपी लोक सेवा आयोग (UPPSC) के 9 जनवरी 2020 के नियम को रद्द कर दिया। आयोग को तीन महीने में इसकी समीक्षा कर नई नीति बनाने का निर्देश दिया गया है।
यह मामला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी भर्ती से जुड़ा था। UPPSC का तर्क था कि स्क्रीनिंग परीक्षा सिर्फ छंटनी के लिए है। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि जब स्क्रीनिंग के अंक अंतिम चयन में 75 प्रतिशत योगदान देते हैं, तो इसे सिर्फ छंटनी की परीक्षा नहीं माना जा सकता।
