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मऊ जिला कलेक्ट्रेट परिसर में सोमवार शाम 4 बजे उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के बैनर तले दर्जनों शिक्षामित्रों ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। शिक्षामित्रों ने समस्याओं के समाधान की मांग करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भेजा। शिक्षामित्रों ने कहा कि प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में पिछले 26 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षामित्रों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार की ओर से समय-समय पर शासनादेश जारी किए गए हैं। संघ ने इसके लिए सरकार के प्रति आभार जताया।
संघ के अनुसार, 3 जनवरी 2025 को मूल विद्यालय में वापसी और महिला शिक्षामित्रों को उनके पति के निवास स्थान की ग्राम पंचायत या वार्ड के विद्यालय में स्थानांतरण का शासनादेश जारी किया गया था। इसके बाद महानिदेशक स्कूल शिक्षा की ओर से 12 जून 2025 और निदेशक बेसिक शिक्षा की ओर से 9 दिसंबर 2025 को जनपद स्तर पर शिक्षामित्रों के समायोजन का आदेश जारी किया गया। संघ का दावा है कि लखनऊ और बाराबंकी को छोड़कर अन्य जनपदों में अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इससे कई शिक्षामित्रों को घर से 80 से 90 किलोमीटर दूर जाकर शिक्षण कार्य करना पड़ रहा है। ज्ञापन में शिक्षामित्रों ने टीईटी उत्तीर्ण और एनसीटीई मानकों को पूरा करने वाले करीब 60 हजार शिक्षामित्रों को सुपर टीईटी से छूट देकर शिक्षक पद पर समायोजित करने की मांग की। इसके अलावा सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने, 11 माह के बजाय 12 माह का मानदेय देने और बेसिक स्कूलों में आयोजित होने वाली विशेष टीईटी परीक्षा में शिक्षामित्रों को शामिल होने का अवसर देने की मांग रखी। संघ ने मृत शिक्षामित्रों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने और परिवार के एक सदस्य को योग्यता के अनुसार सरकारी नौकरी देने की भी मांग की। शिक्षामित्रों ने समायोजन प्रक्रिया जल्द पूरी कराने समेत सभी मांगों पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी करने की अपील की। प्रदर्शन के दौरान संगठन के जिलाध्यक्ष जी. राणा, चंद्रभान, हरि गोविंद, प्रवीण राय समेत दर्जनों शिक्षामित्र मौजूद रहे।
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मऊ में शिक्षामित्रों ने मूल विद्यालय वापसी की मांग की:6 मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे, सिटी मजिस्ट्रेट के जरिए सीएम को ज्ञापन भेजा