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रामपुर में उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने अपनी विभिन्न समस्याओं और अपनी पांच मांगों के समाधान को लेकर सोमवार की दोपहर दो बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम जिलाधिकारी के कार्यालय में सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे शिक्षामित्रों ने कहा कि वे पिछले 26 वर्षों से बेसिक शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज भी अनेक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। जिला अध्यक्ष नरेश कुमार मीणा के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में शिक्षामित्रों ने कहा कि उन्होंने अत्यंत विषम परिस्थितियों में भी प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। सरकार को मानवीय और सहानुभूतिपूर्वक विचार कर शीघ्र निर्णय लेना चाहिए। शिक्षामित्र संघ ने ज्ञापन में पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि नॉन-टेट शिक्षामित्रों को शिक्षकों के साथ विशेष टीईटी परीक्षा में सम्मिलित कराया जाए, ताकि उन्हें भी पात्रता साबित करने का मौका मिले। दूसरी मांग में कहा गया है कि टीईटी उत्तीर्ण शिक्षामित्रों को उत्तराखंड की भांति सहायक अध्यापक पद पर समायोजित किया जाए। मानदेय में वृद्धि को लेकर है चौथी मांग तीसरी सबसे बड़ी मांग 26 वर्ष की लंबी सेवा को देखते हुए नियमितीकरण की है। संघ का कहना है कि इतने लंबे समय तक सेवा करने के बाद अब उन्हें नियमित किया जाना चाहिए। चौथी मांग मानदेय में वृद्धि को लेकर है। शिक्षामित्रों ने कहा कि वर्तमान मानदेय महंगाई और वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है, इसलिए उसमें वृद्धि की जाए। पांचवीं मांग मूल विद्यालय वापसी और अंतरजनपदीय स्थानांतरण की प्रक्रिया अति शीघ्र प्रारंभ करने की है। कई शिक्षामित्रों को उनके मूल विद्यालय से दूर तैनात किया गया है, जिससे उन्हें परेशानी हो रही है। ज्ञापन देने के दौरान जिला मंत्री बलवीर यादव, जिला संगठन मंत्री किरन पाल सिंह, जिला उपाध्यक्ष बचन सिंह, रमेश चन्द्र, हेमलता शर्मा, सतीश चौधरी, सतवीर सिंह, जमील अहमद, मुख्य संगठन मंत्री अंजीव सक्सेना और राकेश कुमार सहित बड़ी संख्या में शिक्षामित्र मौजूद रहे।
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शिक्षामित्रों ने मुख्यमंत्री को पांच मांगों का ज्ञापन सौंपा:26 साल की सेवा के बाद नियमितीकरण, मानदेय वृद्धि और विशेष टीईटी की मांग