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रामपुर में डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क में सोमवार दोपहर अपनी मांगों को लेकर सैकड़ों आशा और आशा संगिनी धरने पर बैठीं। करीब एक घंटे तक पार्क में मंथन के बाद सभी आशाएं नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हो गईं। इस दौरान उन्होंने सरकार से कमीशन आधारित भुगतान व्यवस्था खत्म कर स्थायी करने और सम्मानजनक वेतन देने की मांग की। सोमवार दोपहर करीब एक बजे आशा और आशा संगिनियां डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क में एकत्र हुईं। चमरौआ, शाहाबाद, बिलासपुर, मिलक, सैदनगर और टांडा ब्लॉक से आशाएं यहां पहुंचीं। करीब एक घंटे तक अपनी मांगों और आंदोलन की आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। इसके बाद सभी कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ गईं। प्रदर्शन के दौरान आशाएं नारे लगा रही थीं- “अभी करो, अर्जेंट करो, हमको परमानेंट करो” और “आशा एकता जिंदाबाद।” आशाओं ने कहा कि वे स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं के प्रसव और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने सहित कई कार्य उनके जिम्मे हैं। आशाओं ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि वह सरकार की रीढ़ की हड्डी की तरह काम कर रही हैं और सरकार की सिपाही बनकर जिम्मेदारियां निभाती हैं। इसके बावजूद उन्हें सम्मानजनक वेतन नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि विभिन्न कार्यों के लिए उन्हें कमीशन आधारित भुगतान किया जाता है। अब वे कमीशन के बजाय नियमित और सम्मानजनक वेतन चाहती हैं। बिलासपुर ब्लॉक की प्रभारी रंजीत कौर ने बताया कि आंदोलन जारी रहेगा। उनकी कोशिश है कि जिलाधिकारी के माध्यम से सरकार तक आशाओं की मांगें पहुंचाई जाएं और उनका समाधान कराया जाए। आशाओं के कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने के दौरान जिला प्रशासन ने यातायात व्यवस्था के लिए सड़क की एक साइड को खुला रखा। एक तरफ से वाहनों का आवागमन जारी रहा, जबकि दूसरी तरफ आशाएं और संगिनियां नारेबाजी करते हुए डीएम कार्यालय की ओर बढ़ती रहीं।
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रामपुर में आशा और संगिनी धरने पर बैठीं:कमीशन की जगह स्थायी कर सम्मानजनक वेतन देने की मांग, कलेक्ट्रेट पहुंचीं