समिट बिल्डिंग साइबर ठगी केस में 119 गिरफ्तारियां सही:लखनऊ हाईकोर्ट बोला- गिरफ्तारी के आधार बताए गए, कार्रवाई अवैध नहीं


विभूतिखंड की समिट बिल्डिंग में अमेरिकी नागरिकों से कथित साइबर ठगी के मामले में गिरफ्तार 119 लोगों को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने सभी गिरफ्तारियों को सही ठहराते हुए कहा कि आरोपियों को गिरफ्तारी के आधार और कारण रिकवरी मेमो के जरिए बताए गए थे। सिर्फ गिरफ्तारी मेमो में तकनीकी कमी या जनरल डायरी में गिरफ्तारी का उल्लेख नहीं होने से गिरफ्तारी और न्यायिक रिमांड को गैरकानूनी नहीं माना जा सकता। जस्टिस रजनीश कुमार और जस्टिस बबिता रानी की बेंच ने यह आदेश कैरोलिन उर्फ कैरोलिन खारनायर के पिता परमजीत सिंह छाबड़ा और अन्य की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया। याचिका में 13 महिलाओं समेत 14 आरोपियों की गिरफ्तारी को चुनौती दी गई थी। 30 जून की रात कॉल सेंटर पर छापा पुलिस ने 30 जून 2026 की रात करीब 10:30 बजे विभूतिखंड की समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर छापा मारा था। पुलिस के मुताबिक यहां कथित तौर पर अवैध कॉल सेंटर चल रहा था। मौके से 92 पुरुष और 27 महिलाएं मिलीं। पुलिस ने सभी 119 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। आरोप है कि कॉल सेंटर से अमेरिकी नागरिकों को फोन और पॉप-अप मैसेज के जरिए निशाना बनाया जाता था। यहां डायलर, बैंकर और क्लोजर नाम से अलग-अलग टीमें काम कर रही थीं। आरोपियों पर अमेरिकी एजेंसियों के अधिकारी बनकर लोगों से बैंक संबंधी जानकारी हासिल करने और इसके बाद ठगी करने का आरोप है। गिरफ्तारी प्रक्रिया पर उठाए थे सवाल याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई थी कि गिरफ्तारी के दौरान BNSS की धारा 36, 47 और 48 के साथ संविधान के अनुच्छेद 21 और 22(1) का पालन नहीं किया गया। आरोप था कि मौके पर गिरफ्तारी मेमो तैयार नहीं किया गया और गिरफ्तारी के आधार व कारण भी नहीं बताए गए। परिजनों को गिरफ्तारी की सूचना समय पर नहीं देने की बात भी कही गई। आरोपियों की ओर से यह भी कहा गया कि वे कॉल सेंटर में सिर्फ कर्मचारी के तौर पर काम कर रहे थे और उन्हें कथित साइबर ठगी की जानकारी नहीं थी। रिकवरी मेमो में दर्ज थी पूरी जानकारी कोर्ट ने रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद पाया कि रिकवरी मेमो में कॉल सेंटर की कार्यप्रणाली, बरामद उपकरण और कथित साइबर अपराध से जुड़ी जानकारी दर्ज थी। इसमें आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने के आधार और परिस्थितियों का भी उल्लेख था। कोर्ट ने यह भी पाया कि अभियुक्तों ने रिकवरी मेमो प्राप्त करने से इनकार नहीं किया था। ऐसे में गिरफ्तारी के आधार और कारण बताए जाने की प्रक्रिया को पूरी तरह नजरअंदाज किए जाने की दलील स्वीकार नहीं की जा सकती। 24 घंटे से ज्यादा अवैध हिरासत का आरोप भी खारिज खंडपीठ ने आरोपियों को 24 घंटे से अधिक समय तक अवैध हिरासत में रखे जाने की दलील भी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में बताई गई तकनीकी खामियां इतनी गंभीर नहीं थीं कि उनके आधार पर पूरी गिरफ्तारी और न्यायिक रिमांड को अवैध घोषित किया जाए। इस तरह हाईकोर्ट ने 119 आरोपियों की गिरफ्तारी और उसके बाद की न्यायिक रिमांड को चुनौती देने वाली दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

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