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मेरठ में किसान नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव के साथ कथित पुलिस बर्बरता के मामले में अब 10 सितंबर की तारीख बेहद अहम हो गई है। एडीजी जोन भानु भास्कर के निर्देश पर जांच कर रहे सहारनपुर रेंज के डीआईजी अभिषेक सिंह को 15 दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। निर्धारित समय सीमा के मुताबिक जांच रिपोर्ट 10 सितंबर तक सामने आनी है। तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे-वैसे मामले से जुड़े पुलिसकर्मियों और आरोपों के घेरे में आए लोगों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। जांच के दौरान पीड़ित पक्ष के बयान दर्ज करने के बाद डीआईजी ने संबंधित पुलिसकर्मियों का पक्ष भी जाना। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए गए और घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों को भी जांच के दायरे में लिया गया। हालांकि एसएसपी आफिस के सीसीटीवी कैमरों का इस प्रकरण के समय खराब होना सामने आया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि पुलिस के उस दावे की भी पड़ताल की गई, जिसमें दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव के चोटिल होने की वजह स्कूटी फिसलना बताई गई थी। डीआईजी ने उस स्कूटी की भी वीडियोग्राफी कराई, जिससे घटनाक्रम के इस पहलू को जांच में शामिल किया जा सके। ललिता गौतम प्रकरण से शुरू हुआ विवाद
पूरे घटनाक्रम की जड़ 8 जुलाई को हुए ललिता गौतम प्रकरण को लेकर प्रदर्शन से जुड़ी है। कलक्ट्रेट के बाहर जोरदार प्रदर्शन के दौरान जाम लगने की शिकायत पर तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय मौके पर पहुंचे थे। आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कराया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे लोगों में शामिल दलित नेता रवि गौतम एडवोकेट के साथ पुलिस वैन के भीतर भी मारपीट किए जाने का आरोप लगा था। मामले में पुलिस ने 16 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और नौ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इनमें किसान नेता दिग्विजय भाटी भी शामिल थे। मामला मेरठ से निकलकर लखनऊ तक पहुंचा और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हुए। कांवड़ के बीच लगा था मामला शांत होने का अनुमान
लखनऊ तक मामला गूंजने के बाद धीरे-धीरे हालात सामान्य होते दिखाई दिए। इसी बीच कांवड़ यात्रा शुरू हो गई। माना जाने लगा कि विवाद शांत हो चुका है, लेकिन 19 अगस्त को घटनाक्रम ने फिर नया मोड़ ले लिया। किसान नेता मोहित जाटव के खिलाफ दर्ज एक मुकदमे के सिलसिले में दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय से मिलने पुलिस आफिस पहुंचे थे। आरोप है कि वहां किसी बात को लेकर दोनों पक्षों में नोकझोंक हुई। इसके बाद दोनों किसान नेताओं के साथ कथित मारपीट किए जाने का आरोप सामने आया। एसएसपी के सामने, फिर एसओजी के हवाले करने का आरोप
दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने आरोप लगाया कि पहले उनके साथ तत्कालीन एसएसपी के सामने मारपीट की गई और इसके बाद उन्हें एसओजी के पुलिसकर्मियों के हवाले कर दिया गया। आरोप है कि एसओजी के पुलिसकर्मियों ने दोनों को थर्ड डिग्री दी। मामला उस समय और गरमा गया जब विधायक अतुल प्रधान आधी रात को दोनों को पुलिस हिरासत से छुड़ाकर उनके घर पहुंचे। अगले दिन प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने पूरे घटनाक्रम को सार्वजनिक किया। दिग्विजय भाटी ने रोते हुए अपने साथ हुई कथित बर्बरता की आपबीती सुनाई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला एक बार फिर मेरठ से लेकर लखनऊ तक चर्चा में आ गया। एडीजी मेरठ जोन ने तत्काल बैठाई जांच
दिग्विजय भाटी की हालत और उसके आरोपों को गंभीरता से लेते हुए एडीजी जोन भानु भास्कर ने मामले की जांच के आदेश दिए। जांच की जिम्मेदारी सहारनपुर रेंज के डीआईजी अभिषेक सिंह को सौंपी गई। डीआईजी ने मेरठ पहुंचकर जांच शुरू की और अलग-अलग पक्षों से जानकारी जुटाई।
जांच में सिर्फ पीड़ितों के आरोपों को आधार नहीं बनाया गया, बल्कि पुलिसकर्मियों और घटनास्थल के प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए गए। घटनाक्रम से जुड़े भौतिक साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया। स्कूटी की वीडियोग्राफी ने बढ़ाया जांच का दायरा
इस मामले में सबसे अहम बिंदुओं में से एक पुलिस की ओर से दिया गया वह दावा है, जिसमें दिग्विजय और मोहित के घायल होने की वजह स्कूटी फिसलना बताई गई थी। तत्कालीन एसएसपी और अन्य पुलिसकर्मियों की ओर से इसी आधार पर चोटों को लेकर सफाई दी गई थी। डीआईजी अभिषेक सिंह ने उस स्कूटी की भी वीडियोग्राफी कराई, जिसका जिक्र पुलिस के दावे में किया गया था। इससे साफ है कि जांच में चोटों के कारण और पुलिस के दावे की भी पड़ताल की जा रही है। नौ पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के बाद अब एसओजी घेरे में
जांच के बीच इस प्रकरण में अब एसओजी की भूमिका भी सामने आ रही है। आरोप है कि दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव को थर्ड डिग्री देने में एसओजी के कुछ पुलिसकर्मी शामिल थे। अब जांच का एक अहम हिस्सा इन पुलिसकर्मियों की पहचान करना है। सूत्रों के मुताबिक एसओजी के उन पुलिसकर्मियों की पहचान की कवायद शुरू हो चुकी है, जिन पर दोनों किसान नेताओं के साथ कथित मारपीट में शामिल होने के आरोप हैं। इसके अलावा सिविल लाइन थाने के दो दरोगा भी जांच के रडार पर बताए जा रहे हैं। दोनों के नाम दिग्विजय और मोहित जांच अधिकारियों के सामने बता चुके हैं। तत्कालीन एसएसपी समेत नौ पुलिसकर्मियों पर हो चुकी कार्रवाई
मामले में कार्रवाई का सिलसिला पहले ही शुरू हो चुका है। तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय समेत कुल नौ पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो चुकी है। अविनाश पांडेय को लखनऊ अटैच किया जा चुका है। वहीं मेरठ के सिविल लाइन थाने के आठ पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की जा चुकी है। इनमें तत्कालीन एसएचओ अखिलेश कुमार गौड़ भी शामिल हैं। अब जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट होना बाकी है कि 19 अगस्त की रात वास्तव में घटनाक्रम किस तरह हुआ, किसान नेताओं को चोटें कैसे आईं और इसमें किन-किन पुलिसकर्मियों की भूमिका थी। 10 सितंबर पर टिकी सभी की निगाहें
डीआईजी अभिषेक सिंह की जांच अब अपने निर्णायक दौर में पहुंचती दिखाई दे रही है। 10 सितंबर तक रिपोर्ट सौंपे जाने की समय सीमा है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन इस पूरे मामले के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। जांच में पीड़ितों, पुलिसकर्मियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज होने के साथ ही घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों को भी खंगाला जा चुका है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि डीआईजी की रिपोर्ट में किन पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आती है और कथित थर्ड डिग्री के आरोपों पर जांच का निष्कर्ष क्या निकलता है। जांच रिपोर्ट यह तय कर सकती है कि 19 अगस्त की रात की कथित पुलिस बर्बरता की कहानी में अब तक सामने आए नौ पुलिसकर्मियों के बाद और कितने नाम जुड़ते हैं।
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10 सितंबर की डेडलाइन, थर्ड डिग्री मामले में बढ़ी बेचैनी:दिग्विजय-मोहित प्रकरण की जांच अंतिम दौर में, सहारनपुर डीआईजी को सौंपनी है अपनी रिपोर्ट