- Hindi News
- National
- Hassan Khan Mevati 500th Sacrifice Year | Rashtra Pratham Samvad Haryana
1 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

राजा हसन खां मेवाती के 500वें बलिदान वर्ष पर उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए 6 सितंबर से दिसंबर तक 15 कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ‘राष्ट्र प्रथम संवाद’ नाम की इस श्रृंखला में हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली समेत कई जगहों पर कार्यक्रम होंगे। इनमें इतिहासकार, शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा, जनप्रतिनिधि और विभिन्न समुदायों के लोग शामिल होंगे।
‘वंदे सरदार एकता पदयात्रा आयोजन समिति’ ने इन कार्यक्रमों की योजना तैयार की है। अभियान के जरिए राजा हसन खां मेवाती के जीवन, राष्ट्रनिष्ठा और बलिदान की जानकारी युवाओं तक पहुंचाई जाएगी।
फरीदाबाद से शुरू होगी संवाद श्रृंखला
‘राष्ट्र प्रथम संवाद’ की शुरुआत 6 सितंबर को जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद में होगी। कार्यक्रम में करीब 300 प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक प्रतिनिधियों और युवाओं को इंवाइट किया गया है।
हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल, मुख्यमंत्री के ओएसडी राज नेहरू, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर बासित अली, मेवात अध्ययन केंद्र के संरक्षक श्याम सुंदर और ओल्ड फरीदाबाद स्थित मरकज मस्जिद ईदगाह के इमाम मुफ्ती मुस्तजाबुद्दीन मजाहिरी समेत कई लोग इसमें शामिल होंगे।
कार्यक्रम में राजा हसन खां मेवाती के जीवन, खानवा के युद्ध, मेवात की साझी विरासत और राष्ट्रीय एकता में उनके योगदान पर चर्चा होगी। इस दौरान ‘राष्ट्र प्रथम’ नाम की स्मारिका का विमोचन किया जाएगा। राजा हसन खां मेवाती के जीवन और बलिदान पर तैयार वीडियो भी जारी कर दिखाया जाएगा।
इन जगहों पर होंगे कार्यक्रम
फरीदाबाद के बाद अलवर, खानवा का मैदान, कामां, किशनगढ़, भिवाड़ी, पलवल, होडल, हथीन, गुरुग्राम, नूंह, पानीपत, चंडीगढ़ और नई दिल्ली में ‘राष्ट्र प्रथम संवाद’ आयोजित किए जाएंगे।
महाराणा सांगा के साथ बाबर के खिलाफ लड़ा था युद्ध
मुख्यमंत्री के मीडिया समन्वयक एवं वंदे सरदार एकता पदयात्रा के संरक्षक मुकेश वशिष्ठ ने कहा कि राजा हसन खां मेवाती किसी एक जाति, धर्म या क्षेत्र के नायक नहीं बल्कि राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले महान भारतीय योद्धा थे।
उन्होंने कहा कि राजा हसन खां ने बाबर के प्रलोभनों और प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद बाबर ने उन पर हमला कर दिया। राजा हसन खां ने भी युद्ध स्वीकार किया और डटकर मुकाबला किया।
राजा हसन खां मेवाती मेवात के वीर, स्वाभिमानी और वतनपरस्त शासक थे। उन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए महाराणा सांगा के साथ मिलकर मुगल आक्रांता बाबर के विरुद्ध खानवा का युद्ध लड़ा और मार्च 1527 में वीरगति प्राप्त की।
