राजाजीपुरम में राजगोपालाचारी की प्रतिमा लगाने की मांग:प्रमुख चौराहे या पार्क में स्मारक की मांग, सांसद और नगर विकास मंत्री से की अपील


लखनऊ राजाजीपुरम में भारत रत्न चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (राजाजी) की प्रतिमा स्थापित करने की मांग को लेकर स्थानीय निवासियों की बैठक हुई। राजाजीपुरम में हुई बैठक में लोगों ने मुख्यमंत्री, सांसद और नगर विकास मंत्री से राजाजीपुरम आवास विकास कॉलोनी के किसी प्रमुख चौराहे या पार्क में प्रतिमा स्थापित करने की मांग की। बैठक में डॉ. सुधा बाजपेयी, ए.के. सक्सेना, कृष्णावतार गुप्ता, अशोक कुमार, हीरालाल केशवानी, प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव, अंजू गुप्ता, अरविंद प्रधान, मनोज कुमार बाजपेयी, शैलेंद्र कुमार अस्थाना, राजन मिश्रा, प्राची गुप्ता और सत्यम द्विवेदी सहित अन्य लोग मौजूद रहे। निवासियों ने कहा कि राजाजीपुरम का नाम देश के महान स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के नाम पर है, लेकिन क्षेत्र में उनके नाम का कोई स्मारक या प्रतिमा नहीं है। इसलिए प्रमुख स्थान पर उनकी प्रतिमा स्थापित की जानी चाहिए, ताकि युवा पीढ़ी उनके योगदान और विचारों से परिचित हो सके। एशिया की बड़ी कॉलोनियों में शामिल रहा राजाजीपुरम निवासियों के अनुसार, राजाजीपुरम आवास विकास कॉलोनी अपने शुरुआती दौर में एशिया की सबसे बड़ी कॉलोनियों में शामिल रही है। वर्तमान में इसका क्षेत्रफल करीब 15.93 वर्ग किलोमीटर है और यहां 40 हजार से अधिक मकान हैं। लखनऊ में आबादी और विस्तार के लिहाज से यह इंदिरानगर के बाद प्रमुख कॉलोनियों में शामिल है। स्वतंत्रता संग्राम में निभाई अहम भूमिका चक्रवर्ती राजगोपालाचारी स्वतंत्र भारत के पहले और अंतिम भारतीय गवर्नर जनरल थे। उन्होंने असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और कई बार जेल गए। वे महात्मा गांधी के करीबी सहयोगी रहे। प्रशासन और समाज सुधार के क्षेत्र में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। देश के प्रति उनकी सेवाओं के लिए 1954 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। राजगोपालाचारी एक कुशल प्रशासक और राजनेता होने के साथ-साथ साहित्यकार भी थे। उन्होंने रामायण और महाभारत का तमिल और अंग्रेजी में अनुवाद किया। निवासियों का कहना है कि राजाजीपुरम के प्रमुख चौराहे या पार्क में उनकी प्रतिमा लगने से क्षेत्र की पहचान और मजबूत होगी। साथ ही आने वाली पीढ़ियों को राजगोपालाचारी के राष्ट्रसेवा और आदर्शों से प्रेरणा मिलेगी।

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