हाईकोर्ट ने कार्यकारी निदेशक को सौंपी जांच:एम्स गोरखपुर की एमबीबीएस छात्रा का मामला, 24 सितंबर को सुनवाई


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एम्स गोरखपुर की एम बी बी एस छात्रा अंशिका भारद्वाज की याचिका पर सुनवाई करते हुए संस्थान की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता को छात्रा की शिकायतों की जांच कर तीन सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने यह आदेश दिया। याचिका में डीन (एकेडमिक) द्वारा 25 जनवरी 2024 और 7 मार्च 2026 को पारित आदेशों को चुनौती दी गई थी। क्या है मामला जानिये अंशिका भारद्वाज का कहना है कि पहले सेमेस्टर के दौरान चिकित्सीय कारणों से वे उपस्थिति पूरी नहीं कर सकीं, क्योंकि उनके पिता उस समय बिस्तर पर थे और अभी भी बीमार हैं। उनका यह भी कहना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान अन्य छात्रों को उपस्थिति में छूट दी गई, ग्रेस मार्क्स देकर अगले सेमेस्टर में प्रोन्नत किया गया, और कुछ अन्य छात्रों को शर्तें पूरी न करने के बावजूद प्रोफेशनल परीक्षाओं में बैठने दिया गया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि समान परिस्थितियों में होने के बावजूद उन्हें यह राहत नहीं दी गई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता स्वयं व्यक्तिगत रूप से पेश हुईं। डीन (एकेडमिक) डॉ. महिमा मित्तल भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में मौजूद रहीं। प्रतिवादियों की ओर से पेश अधिवक्ता विद्या नाथ शुक्ला ने जवाबी हलफनामा दाखिल किया, जिसे रिकॉर्ड पर लिया गया। जांच करान सही कदम होगा कोर्ट ने माना कि मामला मुख्यतः शैक्षणिक और संस्थागत रिकॉर्ड से जुड़ा है, इसलिए आगे बढ़ने से पहले संस्थान के किसी वरिष्ठ अधिकारी से इसकी जांच कराना उचित होगा। प्रतिवादियों और डीन दोनों ने इस पर सहमति जताई कि यह जांच कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता को सौंपी जाए ,यह नाम स्वयं याचिकाकर्ता ने सुझाया था। छात्रा की पहचान गुप्त रखी जाएगी कोर्ट ने कहा मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता याचिकाकर्ता को सुनवाई का पूरा अवसर देंगी और संबंधित रिकॉर्ड की जांच करेंगी। वे यह सुझाव देंगी कि छात्रा को किस सेमेस्टर में रखा जाए, किस परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए, और किस बैच के साथ उनकी पढ़ाई जारी रहे। जांच के दौरान अगर किसी अन्य छात्र का रिकॉर्ड देखा जाता है, तो उसकी पहचान गुप्त रखी जाएगी और केवल रोल नंबर या अन्य तटस्थ पहचान से उसका उल्लेख होगा। डीन (एकेडमिक) को निर्देश दिया गया है कि वे जांच में पूरा सहयोग करें और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएं। रिपोर्ट तीन सप्ताह के भीतर अदालत में पेश की जानी है, साथ ही यह सुझाव भी दिया जाएगा कि छात्रा के हित में सबसे उपयुक्त कदम क्या होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसने अभी तक मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है, और यह जांच रिपोर्ट केवल अदालत की सहायता के लिए मंगाई गई है, इससे मामले का कोई मुद्दा स्वतः तय नहीं होगा। अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे निर्धारित की गई है।

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