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इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा है कि उच्चीकृत होकर हाईस्कूल या इंटरमीडिएट कॉलेज बन चुके सहायता प्राप्त संस्थानों में जूनियर हाईस्कूल के सेवा नियमों के तहत सहायक अध्यापकों की भर्ती नहीं की जा सकती।
न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखते हुए प्रदीप कुमार सिंह, प्रियंका पाल, मुकेश यादव समेत अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दाखिल सभी विशेष अपीलों को खारिज कर दिया। जानिये क्या है मामला 3 नवंबर 2025 को राज्य के सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में 1,262 सहायक अध्यापकों के पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया। चयन प्रक्रिया और काउंसिलिंग के बीच में राम कुमार भारद्वाज की याचिका पर एकल पीठ ने 19 फरवरी 2026 को आदेश दिया कि जो जूनियर हाईस्कूल उच्चीकृत होकर हाईस्कूल बन चुके हैं, उनके पदों को इस भर्ती प्रक्रिया से पृथक किया जाए।
इसके पालन में शिक्षा विभाग ने मार्च 2026 में अधिसूचनाएं जारी कर उच्चीकृत संस्थानों के पदों को हटा दिया, जिससे पदों की संख्या घटकर 634 रह गई और 19 मार्च 2026 को नई चयन सूची जारी की गई। अपीलकर्ताओं का पक्ष था कि चयन प्रक्रिया के अंतिम दौर में पदों की संख्या घटाना खेल के बीच में नियम बदलने जैसा है, जो कानूनन गलत है। हालांकि, हाईकोर्ट ने माना कि जब कोई जूनियर हाईस्कूल उच्चीकृत होकर माध्यमिक स्कूल बन जाता है, तो उसकी जूनियर हाईस्कूल के रूप में स्वतंत्र कानूनी पहचान समाप्त हो जाती है। अदालत ने कहा कि उच्चीकृत संस्थानों के पदों को बाहर करना चयन के नियम बदलना नहीं, बल्कि विधिक स्थिति के अनुसार पदों की संख्या में किया गया सुधार है। केवल मेरिट लिस्ट या काउंसिलिंग में नाम आने से अभ्यर्थियों को उन पदों पर नियुक्ति का अटूट अधिकार नहीं मिलता जो कानूनन विज्ञापित ही नहीं किए जा सकते थे।
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उच्चीकृत हाईस्कूलों में जूनियर हाईस्कूल के नियमों से भर्ती अवैध:हाईकोर्ट में विशेष अपीलें खारिज, सहायक अध्यापकों की भर्ती का मामला