44 भूखंडों के अधिकतर व्यापारी बंद के पक्ष में नहीं:व्यापारी नेता बोले सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन जरूरी


44 भूखंडों को लेकर चल रहे विवाद के बीच जगदंबा हॉस्पिटल के मालिक की ओर से प्रेस वार्ता कर व्यापारियों के समर्थन में होने का दावा किए जाने के बाद व्यापारी पक्ष की ओर से भी अपना पक्ष रखा गया। व्यापारी नेता आंजनेय ने कहा कि 44 भूखंडों को लेकर व्यापारियों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि अधिकांश व्यापारी बंद के पक्ष में नहीं हैं और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में अपने स्तर से कार्रवाई शुरू कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले एडीएम सिटी और अन्य अधिकारियों की बैठक में एक संदेश पर बड़ी संख्या में व्यापारी पहुंचे थे। करीब 100-100 व्यापारियों के समूह में लोग बैठक में शामिल हुए और अधिकारियों के सामने हाथ उठाकर स्पष्ट किया कि वे दो तारीख के प्रस्तावित बंद में शामिल नहीं हैं। व्यापारियों का कहना था कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में अपने स्तर से भूखंडों को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं, इसलिए बंद में शामिल होने का सवाल नहीं है। व्यापारी नेता ने नवीन शर्मा का जिक्र करते हुए कहा कि वे उनके बड़े भाई हैं और व्यापारी नेता भी हैं। उन्होंने कहा कि वे भी व्यापारियों के साथ हैं, लेकिन सवाल यह है कि यदि वह व्यापारियों के साथ हैं तो पिछले डेढ़ साल से इस लड़ाई में कहां थे। उन्होंने कहा कि जब 606 भूखंड टूट रहे थे और कार्रवाई चल रही थी, उस समय भी व्यापारियों के साथ खड़ा होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि पूरा सेंटर मार्केट और मेरठ का व्यापारी समाज इस मामले को जानता है। उनका दावा है कि वह पिछले करीब डेढ़ साल से व्यापारियों के साथ इस लड़ाई में शामिल हैं और आगे भी व्यापारियों के साथ खड़े रहेंगे। व्यापारी नेता ने कहा कि इसे केवल 44 भूखंडों का मामला बताना सही नहीं है। इन भूखंडों में बड़ी संख्या में व्यापारी जुड़े हैं और एक-एक भूखंड से कई लोगों का कारोबार प्रभावित होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चार-पांच या कुछ लोगों को एक जगह इकट्ठा कर यह दिखाना कि 44 में से अधिकांश व्यापारी समर्थन में हैं, सही तस्वीर नहीं है। उन्होंने कहा कि जो स्थिति बाजार में दिखाई दे रही है, उसमें 44 में से कुछ ही लोग समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन की शुरुआत से ही वह इस मामले में व्यापारियों के साथ हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने व्यापारियों को कई बार बुलाकर उनकी बात सुनी है। सरकार और प्रशासन की ओर से भी मामले के समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार कोई नीति बनाती है तो उसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप होना जरूरी है। पहले भी सरकार की ओर से नीति लाई गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे स्वीकार नहीं किया। ऐसे में सरकार इस बार हर कदम सावधानी से उठा रही है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर्वोपरि है और उसका पालन करना सभी की जिम्मेदारी है। जब तक सुप्रीम कोर्ट किसी नई नीति को मंजूरी नहीं देता, तब तक सरकार भी अपनी ओर से ऐसा फैसला नहीं कर सकती जो कोर्ट के आदेश के विपरीत हो। व्यापारी नेता ने कहा कि सरकार और प्रशासन व्यापारियों के हित में रास्ता निकालने का प्रयास कर रहे हैं। यदि प्रशासन कह रहा है कि तय समय तक व्यापारियों का पक्ष सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा जाएगा और किसी नई नीति को अनुमति मिलती है तो इसकी जानकारी व्यापारियों को दी जाएगी, तो ऐसे प्रयासों का विरोध करने के बजाय सहयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह व्यापारी हैं और हमेशा व्यापारियों के साथ खड़े रहे हैं। मौजूदा स्थिति में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए सरकार और प्रशासन के साथ मिलकर समाधान निकालना ही उचित रास्ता है। उन्होंने कहा कि सरकार यदि व्यापारियों के हित में हाथ बढ़ा रही है तो व्यापारियों को भी उस हाथ को पकड़कर समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *