हाथरस में 1 सितंबर से लागू होगा ‘नो एंट्री’ सिस्टम:भारी वाहनों पर 20 हजार रुपए तक जुर्माना, शहर में भारी और व्यावसायिक वाहनों की एंट्री पर रोक


हाथरस शहर में बढ़ते यातायात दबाव और जाम की समस्या को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। 1 सितंबर से हाथरस शहर में ‘नो एंट्री’ सिस्टम लागू किया जाएगा। यह व्यवस्था सुबह 8 बजे से रात 9 बजे तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान भारी और मध्यम व्यावसायिक वाहनों के शहर में प्रवेश पर रोक रहेगी। नियम तोड़ने वाले वाहनों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत 20 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। अलग-अलग रूट से बाईपास पर भेजे जाएंगे वाहन पुलिस प्रशासन की ओर से रूट डायवर्जन प्लान भी जारी किया गया है। इसके तहत आगरा से अलीगढ़ जाने वाले भारी वाहन नगला भूस, थाना चंदपा से बाईपास होकर निकलेंगे। अलीगढ़/बरेली हाईवे से आगरा की ओर जाने वाले वाहन रूहेरी चौराहा, कोतवाली हाथरस गेट से बाईपास का इस्तेमाल करेंगे। सिकंदराराऊ की तरफ से आने वाले वाहन मेंडू, थाना हाथरस जंक्शन से बाईपास होते हुए आगे जाएंगे। वहीं राया और मुरसान की ओर से आने वाले भारी वाहन हतीसा पुल, कोतवाली हाथरस गेट से बाईपास होकर निकलेंगे। एटा-जलेसर से आने वाले वाहनों को गंदा नाला पर रोका जाएगा एटा-जलेसर की तरफ से आने वाले भारी वाहनों को गंदा नाला, कोतवाली सदर के पास रोका जाएगा। हाथरस की अनाज मंडी में आने-जाने वाले भारी और मध्यम व्यावसायिक वाहन भी शहर के अंदर प्रवेश नहीं कर सकेंगे। इन्हें रूहेरी चौराहा से आगरा-अलीगढ़ बाईपास का इस्तेमाल करना होगा। पेट्रोल, दूध और दवाओं वाले वाहनों को छूट प्रशासन ने आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले वाहनों को ‘नो एंट्री’ से छूट दी है। पेट्रोलियम, एलपीजी, दूध और दवाएं लेकर जाने वाले वाहन इस प्रतिबंध के दायरे में नहीं आएंगे। विशेष परिस्थितियों में भी व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है। वीआईपी/वीवीआईपी आवागमन, त्योहार, जुलूस या धार्मिक आयोजनों के दौरान जरूरत के अनुसार नो एंट्री व्यवस्था को अस्थायी रूप से निरस्त किया जा सकेगा। व्यापारियों के लिए समय में छूट व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए शहर में व्यावसायिक वाहनों के आवागमन के लिए निर्धारित समय में छूट का प्रावधान भी किया गया है। प्रशासन के मुताबिक दोपहर 2:30 बजे तक और शाम 4:30 बजे तक व्यावसायिक वाहनों के आवागमन की अनुमति रहेगी। नई व्यवस्था का उद्देश्य शहर में भारी वाहनों का दबाव कम करना, यातायात व्यवस्था सुचारु करना और जाम की समस्या से लोगों को राहत दिलाना है।

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