मौत के बाद भी नहीं बदला हाईवे क्रॉसिंग का तरीका:आगरा में पुलिस रोकती रही, लोग रेलिंग कूदकर जाते रहे; फुट ओवरब्रिज भी नहीं मिला


आगरा के एत्माद्दौला क्षेत्र में रविवार को संजय निषाद की मौत के बाद भी नेशनल हाईवे-19 पर लोग खतरे से खेल रहे हैं। हादसे के कुछ देर बाद ही महिलाएं, पुरुष और बच्चे सामान लेकर हाईवे की एक लेन से दूसरी लेन तक पैदल जाते दिखाई दिए। पुलिस ने लोगों को रोकने की कोशिश की, लेकिन कई लोग सुरक्षा रेलिंग पार कर शॉर्टकट लेते रहे। यह स्थिति बताती है कि यहां हादसों के बावजूद हाईवे पार करने की मजबूरी और लापरवाही दोनों बरकरार हैं। एक साल पहले मिला था फुट ओवरब्रिज का आश्वासन रामबाग और ट्रांस यमुना क्षेत्र में हाईवे पार करने के दौरान पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। लगातार दुर्घटनाओं के विरोध में करीब एक साल पहले स्थानीय लोगों ने धरना-प्रदर्शन किया था। लोगों की मुख्य मांग फुट ओवरब्रिज बनाने की थी। धरने के दौरान क्षेत्रीय विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह ने फुट ओवरब्रिज बनवाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद लोगों ने धरना समाप्त कर दिया था। लेकिन अब तक सुरक्षित पैदल पार की स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है। रेलिंग बनी, रास्ता नहीं हाईवे और सर्विस लेन के बीच सुरक्षा रेलिंग लगाई गई है। इसका उद्देश्य लोगों को सीधे हाईवे पर जाने से रोकना है। लेकिन स्थानीय लोग रेलिंग के बीच से निकलकर या डिवाइडर पार करके सड़क पार कर लेते हैं। मुख्य एलिवेटेड हाईवे पर तेज रफ्तार वाहन चलते हैं। नीचे सर्विस लेन और आसपास घनी आबादी है। ऐसे में पैदल लोगों के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग नहीं होने से हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। मेट्रो निर्माण के बीच बढ़ी चुनौती क्षेत्र में मेट्रो पुल का निर्माण भी चल रहा है। निर्माण के कारण सड़क और आसपास की आवाजाही पहले से प्रभावित है। ऐसे में हाईवे पार करने वालों की सुरक्षा और यातायात प्रबंधन और महत्वपूर्ण हो गया है। रविवार की घटना के बाद सवाल फिर वही है—क्या किसी और हादसे के बाद ही यहां फुट ओवरब्रिज या सुरक्षित पैदल क्रॉसिंग की व्यवस्था होगी? स्थानीय लोग लंबे समय से इस मांग को उठा रहे हैं।

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