पीएम मोदी से मिले स्पेस स्टार्टअप्स के फाउंडर्स:स्काईरूट अगले साल से हर महीने लॉन्च करेगी रॉकेट; भारत में बनेंगे स्पेस पेट्रोल पंप और दवाइयां


भारत सरकार की स्पेस पॉलिसी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से देश का स्पेस सेक्टर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। पीएम मोदी ने भारतीय स्पेस-टेक स्टार्टअप्स के फाउंडर्स से बातचीत की और उनके इनोवेशन और आगे की योजनाओं की जानकारी ली। इस दौरान पीएम ने भरोसा दिलाया कि सरकार अपनी नीतियों में निरंतरता बनाए रखेगी, ताकि रिस्क लेने वाले उद्यमियों को पूरा सपोर्ट मिले। मीटिंग में भारत के पहले प्राइवेट स्पेस यूनिकॉर्न स्काईरूट सहित कुछ अन्य इनोवेटिव स्टार्टअप्स ने अपने फ्यूचर प्लान शेयर किए। भारतीय स्टार्टअप्स अब सिर्फ रॉकेट लॉन्चिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अंतरिक्ष में कचरा हटाने, स्पेस में रीफ्यूलिंग स्टेशन बनाने और जीरो-ग्रेविटी में दवाइयां बनाने जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। स्काईरूट का हर महीने रॉकेट लॉन्च करने का लक्ष्य स्काईरूट ने पीएम मोदी को बताया कि 18 जुलाई को भारत के पहले प्राइवेट रॉकेट से सैटेलाइट्स को कामयाबी के साथ ऑर्बिट में स्थापित किया था। कंपनी ने अब तक 3 फैक्ट्रियां तैयार कर ली हैं, जिनमें हर महीने एक रॉकेट बनाने की क्षमता है। कंपनी की योजना हर महीने एक रॉकेट लॉन्च करने की है। इसके बाद का लक्ष्य हर हफ्ते एक और भविष्य में हर दिन कई रॉकेट लॉन्च करने का है। स्काईरूट ने दुनिया के सबसे आधुनिक इंजनों में से एक विकसित किया है, जिसकी टेस्टिंग चल रही है। पेट्रोल पंप, सफाई रोबोट और दवा बनाने वाली सैटेलाइट्स भारतीय स्टार्टअप्स कई नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं: जब धरती पर कोई दवा बनाई जाती है, तो गुरुत्वाकर्षण के खिंचाव के कारण उसके केमिकल्स और प्रोटीन ठीक से मिक्स नहीं हो पाते या नीचे बैठने लगते हैं। इसके उलट, अंतरिक्ष में दवाइयां और प्रोटीन बिना किसी खिंचाव के शुद्ध रूप में आपस में मिलते हैं। इससे दवाइयों के बनने का तरीका बेहद सटीक और साफ होता है। अमेरिका-यूरोप छोड़कर भारत आ रहे इंजीनियर्स स्पेस सेक्टर को प्राइवेट प्लेयर्स के लिए खोले जाने के बाद एक नया ग्लोबल ट्रेंड दिख रहा है। अमेरिका और यूरोप में काम करने वाले भारतीय इंजीनियर्स अब अपनी नौकरियां छोड़कर भारत लौट रहे हैं और देश के स्पेस स्टार्टअप्स से जुड़ रहे हैं। इस पर पीएम मोदी ने कहा कि भारत को एक ऐसा माहौल बनाना चाहिए कि पूरी दुनिया का टैलेंट स्पेस सेक्टर में करियर बनाने के लिए भारत का रुख करे। भारतीय टैलेंट पूल दुनिया के वैज्ञानिकों को अपनी तरफ खींचने वाले मैग्नेट की तरह काम कर सकता है। 1 महीने में मिले 8 नए इंटरनेशनल कॉन्ट्रैक्ट्स भारतीय स्टार्टअप्स ग्लोबल लेवल पर ग्राउंड स्टेशन नेटवर्क तैयार कर रहे हैं और सैटेलाइट इंजनों का एक्सपोर्ट करने के लिए तैयार हैं। यह इंजन सैटेलाइट्स को स्पेस में 5 से 15 सालों तक एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में मदद करते हैं। कॉस्ट-इफेक्टिवनेस यानी कम लागत और टैलेंट के दम पर भारतीय कंपनियों को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। पिछले एक महीने में ही भारतीय स्टार्टअप्स को 8 नए लॉन्च के कॉन्ट्रैक्ट्स मिले हैं, जिनमें ज्यादातर विदेशी क्लाइंट्स के हैं। स्पेस डेटा से 10 लाख किसानों की मदद की तैयारी स्पेस-टेक स्टार्टअप्स का फोकस भारत के कृषि क्षेत्र पर भी है। स्टार्टअप्स की योजना स्पेस डेटा और सैटेलाइट्स के जरिए लगभग 10 लाख किसानों की मदद करने की है। इससे मौसम, मिट्टी की नमी और फसलों के स्वास्थ्य की सटीक जानकारी मिलेगी, जिससे खेती-किसानी को ज्यादा फायदेमंद बनाया जा सके।

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