डॉक्टरों के लिए एक यूनिक ID का प्रस्ताव:देश में कहीं भी कर सकेंगे प्रैक्टिस, बार-बार रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं


नई दिल्ली, 20 अगस्त। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने हर रजिस्टर्ड डॉक्टर के लिए केंद्रीय स्तर पर यूनिक आइडेंटिफिकेशन (UID) नंबर जारी करने का प्रस्ताव दिया है। इससे डॉक्टरों को देश में कहीं भी प्रैक्टिस करने के लिए नया रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस नहीं लेना होगा। यह प्रस्ताव 11 अगस्त को NMC की ओर से जारी मेडिकल प्रैक्टिशनर्स के रजिस्ट्रेशन और प्रैक्टिस लाइसेंस से जुड़े संशोधन नियमों के ड्राफ्ट में है। ड्राफ्ट के मुताबिक, राज्य मेडिकल रजिस्टर में किसी व्यक्ति या विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट का रजिस्ट्रेशन होने के बाद NMC का एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड (EMRB) केंद्रीय रूप से UID जारी करेगा। UID मिलने पर डॉक्टर का नेशनल मेडिकल रजिस्टर (NMR) में रजिस्ट्रेशन होगा और उसे पूरे भारत में प्रैक्टिस करने की पात्रता मिलेगी। UID से देशभर में प्रैक्टिस की पात्रता NMR का रखरखाव EMRB करेगा। राज्य मेडिकल रजिस्टर में रजिस्टर्ड हर डॉक्टर को UID दिया जाएगा। NMR नंबर पूरे भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए मान्य होगा। ड्राफ्ट के अनुसार, UID में संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश का कोड और राज्य मेडिकल रजिस्टर की ओर से दिया गया रजिस्ट्रेशन नंबर शामिल होगा। EMRB यह सुनिश्चित करेगा कि दोनों रजिस्टर इस तरह सिंक्रनाइज रहें कि किसी एक रजिस्टर में हुआ बदलाव अपने आप दूसरे रजिस्टर में भी दर्ज हो जाए। NMC ने प्रस्ताव दिया है कि NMR रजिस्टर्ड डॉक्टरों की रजिस्ट्रेशन डिटेल और उनके खिलाफ हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई का केंद्रीय रिकॉर्ड रखे। इसमें राज्य मेडिकल काउंसिल, EMRB या NMC की ओर से जारी लाइसेंस निलंबन, हटाने और बहाली से जुड़े आदेश भी शामिल होंगे। NMR में डॉक्टर के लाइसेंस का एक्टिव या इनएक्टिव स्टेटस और अनुशासनात्मक कार्रवाई की डिटेल भी दर्ज होगी। EMRB और NMC को निगरानी के अधिकार प्रस्तावित नियमों के तहत EMRB और NMC को राज्य मेडिकल काउंसिल को दिशा-निर्देश देने, जानकारी और रिकॉर्ड मांगने और नियमों के पालन की निगरानी करने का अधिकार मिलेगा। इसका उद्देश्य पूरे भारत में डॉक्टरों के नियमन में एकरूपता, पारदर्शिता और प्रभावी व्यवस्था बनाए रखना है। प्रस्तावित सिस्टम में डॉक्टर रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस के लिए EMRB के यूनिफाइड रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर आवेदन करेगा। संबंधित राज्य मेडिकल काउंसिल लागू फीस लेने के बाद 30 दिन के भीतर आवेदन पर कार्रवाई करेगी। राज्य मेडिकल काउंसिल से रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस मिलने और EMRB की ओर से NMR में UID जारी होने के बाद डॉक्टर किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में प्रैक्टिस कर सकेगा। ड्राफ्ट में कहा गया है कि डॉक्टर को भारत के किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में प्रैक्टिस करने के लिए दूसरे राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में नया रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। अनुशासनात्मक कार्रवाई का रिकॉर्ड ऑनलाइन अपडेट होगा प्रस्तावित बदलावों से डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को ट्रैक करने की एकीकृत व्यवस्था भी बनेगी। पेशेवर कदाचार, अनैतिक आचरण या मेडिकल लापरवाही की शिकायत होने पर उस राज्य की मेडिकल काउंसिल मामले की जांच करेगी, जिसके क्षेत्र में घटना हुई है। वही काउंसिल मामले पर फैसला भी करेगी। संबंधित काउंसिल अपने फैसले को लागू कर सकेगी और डॉक्टर के ऑनलाइन रिकॉर्ड में इसकी जानकारी दर्ज करेगी। अगर डॉक्टर के मुख्य रजिस्ट्रेशन वाले राज्य की मेडिकल काउंसिल के अलावा कोई दूसरी राज्य मेडिकल काउंसिल अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश करती है, तो यह कार्रवाई NMR में दर्ज होगी। इसके बाद मुख्य रजिस्ट्रेशन वाली काउंसिल के राज्य मेडिकल रजिस्टर में भी यह जानकारी अपने आप अपडेट हो जाएगी। लाइसेंस पांच साल के लिए मान्य रहेगा मेडिकल प्रैक्टिस का लाइसेंस पांच साल तक मान्य रहेगा। लाइसेंस की अवधि खत्म होने के तीन महीने के भीतर डॉक्टर ने रिन्यूअल के लिए आवेदन नहीं किया, तो राज्य मेडिकल रजिस्टर में उसका रिकॉर्ड इनएक्टिव कर दिया जाएगा। इनएक्टिव स्टेटस के बाद डॉक्टर मेडिकल प्रैक्टिस नहीं कर सकेगा। यह स्टेटस अपने आप NMR में भी दर्ज हो जाएगा। आवेदन खारिज होने पर अपील का अधिकार ड्राफ्ट में अपील की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। राज्य मेडिकल काउंसिल अगर रजिस्ट्रेशन, प्रैक्टिस लाइसेंस या लाइसेंस रिन्यूअल का आवेदन खारिज करती है, तो आवेदक फैसले की जानकारी मिलने के 30 दिन के भीतर EMRB में अपील कर सकेगा। EMRB अपील की जांच कर 30 दिन के भीतर फैसला करेगा। अगर EMRB अपील मंजूर करता है, तो राज्य मेडिकल काउंसिल को रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस देने या लाइसेंस रिन्यू करने का उसका आदेश मानना होगा। राज्य मेडिकल काउंसिल को EMRB का आदेश मिलने के 15 दिन के भीतर कार्रवाई करनी होगी। पहले से रजिस्टर्ड डॉक्टरों के लिए एक बार UID अपडेट इंडियन मेडिकल रजिस्टर या राज्य मेडिकल रजिस्टर में पहले से रजिस्टर्ड डॉक्टरों के पास अगर प्रस्तावित नियमों के तहत UID नहीं है, तो उनके लिए एक बार की प्रक्रिया रखी गई है। ऐसे डॉक्टर EMRB पोर्टल पर अपनी डिटेल अपडेट कर UID ले सकेंगे। ड्राफ्ट के अनुसार, मौजूदा डॉक्टरों की UID डिटेल अपडेट करने के लिए EMRB कोई फीस नहीं लेगा। विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट और विदेशी छात्रों के लिए प्रस्ताव विदेशी मेडिकल क्वालिफिकेशन हासिल करने और FMGE पास करने वाला विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट NMR में रजिस्ट्रेशन के लिए पात्र होगा। नेशनल एग्जिट टेस्ट लागू होने के बाद उसे पास करने वाले विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट भी संबंधित नियमों में तय शर्तों के तहत रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। भारत में पोस्टग्रेजुएट या सुपर-स्पेशियलिटी कोर्स करने वाले विदेशी नागरिकों को कोर्स की अवधि के लिए अस्थायी रजिस्ट्रेशन दिया जा सकेगा। यह रजिस्ट्रेशन अधिकतम 24 महीने के लिए होगा। इसके बाद एक साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड रहेगा। यह अस्थायी रजिस्ट्रेशन सिर्फ उस मेडिकल कॉलेज, संस्थान या अस्पताल तक सीमित होगा, जो कोर्स चला रहा है। NMC ने 30 दिन में आपत्तियां मांगीं NMC ने ड्राफ्ट नियमों पर हितधारकों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। नोटिफिकेशन के अनुसार, गजट में ड्राफ्ट उपलब्ध होने की तारीख से 30 दिन पूरे होने के बाद प्रस्तावित संशोधनों पर विचार किया जाएगा। कमीशन ने 7 अप्रैल 2026 को गजट में प्रकाशित अपने पहले के संशोधन ड्राफ्ट को वापस ले लिया है। प्रस्तावित व्यवस्था को अंतिम रूप देकर लागू किए जाने के बाद राज्यवार अलग-अलग रजिस्ट्रेशन वाली मौजूदा व्यवस्था की जगह राष्ट्रीय UID आधारित सिस्टम आएगा। इसमें रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस देने की भूमिका राज्य मेडिकल काउंसिल के पास रहेगी और अपने क्षेत्र में आने वाले मामलों पर कार्रवाई का अधिकार भी इन्हीं काउंसिल के पास रहेगा।

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