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- Lashkar Commander Mohammad Asif Killed In Yusmarg | Kashmir Terror Attack
श्रीनगर1 मिनट पहले
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जम्मू-कश्मीर के यूसमर्ग में मारा गया लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा गोली से हुए घावों पर शहद लगाता था। वह घाव जल्दी भरने और संक्रमण रोकने के लिए यह तरीका अपनाता था।
मूसा को 4 दिन पहले मध्य कश्मीर के बडगाम के यूसमर्ग में सेना ने मार गिराया। वह जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित लश्कर का मुख्य ऑपरेशनल कमांडर और 2025 के पहलगाम आतंकी हमले में शामिल था।
यह माना जाता है कि शुद्ध शहद के आयुर्वेदिक गुण घाव के टिशू रिकवरी को तेज करता है। साथ ही संक्रमण फैलने से भी बचाता है।
सितंबर में ही मारे गए एक और आतंकी यासिर के फोन में मूसा के शहद से उपचार किए गए घावों की तस्वीरें मिलीं।
ये तस्वीरें पाकिस्तानी हैंडलरों को भेजी गई थीं और उन्हें मूसा की सेहत की जानकारी दी गई थी।
मूसा को ऑपरेशन शेरुवाली के दौरान गोली लगी थी
मूसा को राजौरी के डोरिमल-गंभीर मुगला इलाके में ऑपरेशन शेरुवाली के दौरान गोली लगी थी। दो आतंकियों की तलाश में यह ऑपरेशन 45 दिनों से ज्यादा चला था। मूसा और उसका साथी यासिर पुंछ-राजौरी के जंगलों में छिपे थे।
सुरक्षा घेरा होने के कारण मूसा को इलाज नहीं मिल पा रहा था, इसलिए उसने घावों पर शहद लगाया। हैंडलर यह निर्देश दे रहे थे कि शहद शुद्ध होना चाहिए। उनका मानना था कि इससे मूसा के घाव जल्दी भरने में मदद मिलेगी।
परवेज मुशर्रफ की VVIP सुरक्षा टीम में तैनात था मूसा

पाकिस्तान सेना का आइडेंटिटी कार्ड।
न्यूज एजेंसी ANI के सूत्रों के मुताबिक,मोहम्मद आसिफ उर्फ मूसा का जन्म 7 मार्च 1980 को हुआ था। वह 2000 में PA-3106947 सर्विस नंबर के साथ पाकिस्तान सेना में भर्ती हुआ। बाद में हवलदार के पद से रिटायर हुआ।
2005 में मोहम्मद आसिफ को स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) में शामिल किया गया। 4 कमांडो ‘यलगार’ बटालियन में भी रहा। 2006 से उसकी पोस्टिंग बलूचिस्तान में रही।
2006 से 2009 के बीच मूसा ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की VVIP सुरक्षा टीम के सदस्य के तौर पर भी काम किया था।
अधिकारियों के मुताबिक, मूसा करीब एक दर्जन आतंकी हमलों में शामिल था। इनमें 2025 का पहलगाम हमला भी शामिल है। बैसरन के मैदानों में हुए इस हमले में 26 लोग मारे गए थे। इनमें ज्यादातर पर्यटक थे।
आयुर्वेद में शहद से घाव का इलाज
मेडिकल एक्सपर्ट्स ने कहा कि जंगल में मूसा का यह तरीका घावों के इलाज से जुड़े पुराने आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित था।
ऑल इंडिया डॉक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन के अध्यक्ष डॉ. आरपी पाराशर ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में सुश्रुत संहिता जैसे ग्रंथों में घाव की देखभाल के लिए शहद का इस्तेमाल बताया गया है।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में इसे व्रण चिकित्सा कहा जाता है। इसमें शहद के शोधन यानी सफाई और रोपण यानी घाव भरने वाले गुणों का इस्तेमाल होता है।
डॉ. पाराशर ने कहा, “आधुनिक रिसर्च से इन बातों की संभावित वजहें समझ आती हैं। शहद की ज्यादा ऑस्मोटिक एक्टिविटी, एसिडिक pH और कुछ तरह के शहद में हाइड्रोजन पेरोक्साइड बनना शामिल है।”
उन्होंने कहा कि शहद में मौजूद अन्य एंटीमाइक्रोबियल तत्व भी बैक्टीरिया की बढ़त रोक सकते हैं। इससे घाव भरने के लिए बेहतर माहौल बन सकता है।
हालांकि, उन्होंने बंदूक की गोली के घावों के इलाज में सावधानी बरतने को कहा। उन्होंने बताया कि घाव को अच्छी तरह साफ करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि घाव में गोली के बचे हुए कण उपचार में रुकावट डाल सकते हैं। साथ ही, क्लिनिकल इलाज में संक्रमण रोकने के लिए स्टेराइल मेडिकल-ग्रेड शहद का इस्तेमाल होना चाहिए।
फूड साइंस एंड इंजीनियरिंग पर प्रकाशित एक रिसर्च पेपर के मुताबिक, घाव पर शहद लगाने से उसके भरने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। यह घाव में मौजूद संक्रमण को भी कम कर सकता है।
रिसर्च पेपर में कहा गया है, “शहद की पट्टी घाव भरने की प्रक्रिया तेज कर सकती है। यह घाव को संक्रमण से मुक्त करने और दर्द कम करने में मदद कर सकती है।”
इसमें कहा गया है कि शहद घाव से तरल बाहर खींचने और अपने जैविक असर के जरिए उसे तेजी से साफ करता है। यही प्रक्रिया जलने के घावों में भी मददगार हो सकती है।
वेटरनरी एक्सपर्ट डॉ. जहांजेब सिरवाल ने फार्माकोलॉजी की पढ़ाई का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि शहद एक ऑस्मोटिक एजेंट की तरह काम करता है।
उनके मुताबिक, यह घाव से तरल बाहर खींचता है। इससे मृत ऊतक हटाने में मदद मिलती है और सूजन कम होती है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक रिसर्च के अनुसार, शहद शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया को बढ़ाता है। यह ऊतक की मरम्मत की प्रक्रिया भी शुरू करता है।
डॉ. सिरवाल ने कहा कि इससे उन जगहों पर भी मदद मिल सकती है, जहां सामान्य इलाज मुश्किल होता है।
उन्होंने कहा, “जंगल में रहने वाले लोगों के लिए जलने या चोट लगने पर शहद एक आसान तरीका बन जाता है। इसका इस्तेमाल अक्सर मवेशियों पर भी किया जाता है।”
मूसा पर एक दर्जन से ज्यादा हमलों का आरोप
अधिकारियों के मुताबिक, मूसा को मार गिराना जम्मू-कश्मीर में सक्रिय बड़े आतंकी कमांडरों में से एक के खिलाफ पांच साल से चल रही तलाश का अंत है।
अधिकारियों ने कहा कि मूसा सुरक्षा बलों और आम लोगों पर हुए एक दर्जन से ज्यादा बड़े आतंकी हमलों में सीधे शामिल था।
उसने अप्रैल 2023 में पुंछ के भट्टा दुरियां में हुए हमले की साजिश रची थी। इसमें पांच सैनिक मारे गए थे।
इसके बाद मई 2023 में राजौरी के कांडी जंगल में धमाका हुआ था। इसमें पांच कमांडो मारे गए थे।
दिसंबर 2023 में उसने पुंछ के डेरा की गली में हुए घात लगाकर हमले का नेतृत्व किया था। इसमें सेना के चार जवानों की मौत हुई थी।
मई 2024 में शशितार के पास भारतीय वायुसेना के काफिले को निशाना बनाया गया था। इसमें वायुसेना का एक जवान मारा गया था।
2024 की देर पतझड़ तक मूसा ने आम लोगों और अहम ढांचों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था।
20 अक्टूबर को गंदरबल में गगनगीर टनल प्रोजेक्ट के निर्माण शिविर पर हमला हुआ था। इसमें एक स्थानीय डॉक्टर समेत सात लोग मारे गए थे।
इसके चार दिन बाद उसके मॉड्यूल ने बुटापथरी में सेना के वाहन पर घात लगाकर हमला किया। इसमें दो सैनिक और दो नागरिक रक्षा पोर्टर मारे गए थे।
