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बरेली में न्यायालय परिसर से चैंबर हटाए जाने के विरोध में अधिवक्ताओं का अनिश्चितकालीन धरना मंगलवार को भी जारी रहा। इस आंदोलन को अब कांग्रेस का भी समर्थन मिल गया है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष मिर्जा अशफाक सकलैनी धरना स्थल पर पहुंचे और अधिवक्ताओं की मांगों का समर्थन किया।अधिवक्ताओं का आरोप है कि 13 अगस्त को नगर निगम प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के उनके चैंबरों को बुलडोजर से हटा दिया था। इस कार्रवाई के दौरान चैंबरों में रखी पत्रावलियां, महत्वपूर्ण दस्तावेज और न्यायिक कार्य से संबंधित अन्य सामान भी क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे उनके कामकाज और आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।धरने पर मौजूद एडवोकेट इमरान ने बताया कि अधिवक्ताओं की प्रमुख मांग है कि ऑफिसर्स हॉस्टल से सुधीर जैन चौक तक नाले के ऊपर पूर्व की तरह अस्थायी सीट और चैंबर लगाने की विधिवत अनुमति दी जाए। इसके अतिरिक्त, प्रभावित प्रत्येक अधिवक्ता को दो लाख रुपये की आर्थिक क्षतिपूर्ति प्रदान करने की भी मांग की गई है।अधिवक्ताओं ने जब्त की गई पत्रावलियों और अन्य आवश्यक सामान को सम्मानपूर्वक वापस करने की मांग की है। साथ ही, भविष्य में किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले संबंधित अधिवक्ताओं और बार एसोसिएशन को लिखित सूचना देने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग रखी गई है।अधिवक्ताओं का कहना है कि उनका विरोध केवल चैंबर हटाने की वर्तमान कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि वे भविष्य में ऐसी किसी भी कार्रवाई के लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया और पूर्व सूचना की व्यवस्था चाहते हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि जब तक उनकी मांगों का ठोस और लिखित समाधान नहीं मिल जाता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।कांग्रेस जिलाध्यक्ष मिर्जा अशफाक सकलैनी ने आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए अधिवक्ताओं की मांगों पर तत्काल समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके धरने में शामिल होने से इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी प्राप्त हुआ है।धरने में एडवोकेट जितेंद्र कुमार कश्यप, धर्मवीर सिंह तोमर, दीपक कुमार, सोमेंद्र सिंह यादव, इमरान राजा, आबिद हुसैन, सज्जाद अली, विकास कुमार, साकिब हुसैन, महावीर, सद्दाम हुसैन, सामी नसीम, समीर, प्रखर अग्रवाल, प्रियोर मिश्रा, शबाना परवीन, मो. हसनैन सहित कई अन्य अधिवक्ता उपस्थित रहे।
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अधिवक्ताओं के आंदोलन को कांग्रेस का समर्थन:जिलाध्यक्ष बोले-लिखित समाधान तक जारी रहे संघर्ष