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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने हेड कांस्टेबल (मोटर ट्रांसपोर्ट) पद पर पदोन्नति के लिए हुई विभागीय परीक्षा में कथित नकल और अनियमितताओं के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने परीक्षा में शामिल सभी 176 अभ्यर्थियों का पूरा परिणाम और चयनित अभ्यर्थियों का सिटिंग प्लान पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने कांस्टेबल-ड्राइवर शिव बाबू मिश्रा व छह अन्य की याचिका पर दिया। याचिका में 5 अक्टूबर 2025 को कांस्टेबल-ड्राइवर से हेड कांस्टेबल (मोटर ट्रांसपोर्ट) पद पर पदोन्नति के लिए आयोजित विभागीय परीक्षा को चुनौती दी गई है। याचियों का आरोप है कि परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से बड़े पैमाने पर नकल हुई। उन्होंने परीक्षा और उसके आधार पर की गई सभी परिणामी कार्रवाई को निरस्त कर दोबारा पारदर्शी तरीके से परीक्षा कराने की मांग की है। पुलिस परिणाम प्रोन्नति बोर्ड की वेबसाइट पर नहीं हुआ अपलोड सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि परीक्षा में शामिल 176 अभ्यर्थियों का परिणाम घोषित हो चुका है, लेकिन पूरा परिणाम पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया। बोर्ड की अपर पुलिस अधीक्षक मोहिनी पाठक ने न्यायालय में इसकी पुष्टि की। बोर्ड ने पिछली सुनवाई में बताया था कि परीक्षा के दौरान केवल दो अभ्यर्थी मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते मिले थे। हालांकि, न्यायालय के निर्देश पर हुई जांच के बाद 115 अभ्यर्थियों को नकल और अन्य अनियमितताओं में शामिल पाया गया। इन सभी को डिबार किया जा चुका है। न्यायालय ने परीक्षा के सभी आठ ब्लॉकों की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया था। 10 अगस्त को संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड कोर्ट में पेश किए गए, जिन्हें न्यायालय ने अपने कब्जे में ले लिया। न्यायालय ने कहा कि परीक्षा की वीडियो रिकॉर्डिंग और उसमें उपलब्ध तस्वीरों का परीक्षण कर मामले का उचित निस्तारण किया जाएगा।
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पुलिस विभागीय परीक्षा में नकल का मामला:हाईकोर्ट ने 176 अभ्यर्थियों का पूरा रिजल्ट और सिटिंग प्लान मांगा