जीत के बाद तिरंगा लेकर दौड़ती हुई प्राची।
सहारनपुर के झबीरण गांव की प्राची चौधरी ने अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स में एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली। जापान के आइची-नागोया में आयोजित 20वें एशियन गेम्स में प्राची ने महिलाओं की 400 मीटर स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया। फाइनल में तीसरे स्थान पर र
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प्राची के लिए यह पदक इसलिए भी खास है, क्योंकि इस बार उन्होंने टीम स्पर्धा में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत 400 मीटर दौड़ में एशियाई स्तर पर अपनी जगह बनाई है। इससे पहले वह एशियन गेम्स में भारत की 4×400 मीटर रिले टीम के साथ रजत पदक जीत चुकी हैं। अब व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य मिलने से उनके अंतरराष्ट्रीय करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है।
जूते और सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन दौड़ने का जुनून था

प्राची की फाइल फोटो।
प्राची के खेल सफर की शुरुआत किसी बड़े स्टेडियम या आधुनिक सिंथेटिक ट्रैक से नहीं हुई थी। परिवार के मुताबिक, शुरुआती दिनों में आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि अभ्यास के लिए अच्छे जूते तक उपलब्ध नहीं थे। प्राची गांव के आसपास की सड़कों और पगडंडियों पर दौड़कर अपनी तैयारी करती थीं। कई बार उन्होंने नंगे पैर भी अभ्यास किया।
कक्षा 10 के आसपास उन्होंने एथलेटिक्स को गंभीरता से लेना शुरू किया। स्थानीय और स्कूली प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन के बाद उनका सफर जिला और प्रदेश स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंचा। इसके बाद राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय एथलेटिक्स टीम के लिए दावेदार बनाया।
पिता जयवीर सिंह और मां राजेश देवी के लिए बेटी की यह उपलब्धि वर्षों की मेहनत का परिणाम है। परिवार के अनुसार, भारतीय टीम में चयन की सूचना मिलने पर प्राची ने फोन पर परिजनों से बात करते हुए भावुक होकर यह खबर साझा की थी। घर में टीवी देखते परिवार को जब बेटी के चयन की जानकारी मिली तो खुशी का माहौल बन गया था।
2017-18 में शुरू हुआ राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का दौर
प्राची ने शुरुआती वर्षों में 400 मीटर को अपनी मुख्य स्पर्धा बनाया। 2017 में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में उन्होंने 400 मीटर में 56.65 सेकंड का समय दर्ज किया। इसके बाद 2018 में उनके प्रदर्शन में तेजी से सुधार हुआ। नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 400 मीटर में रजत पदक जीता। इसी दौर में गुवाहाटी इंटर स्टेट चैंपियनशिप में उनका समय 52.96 सेकंड रहा।
इन प्रदर्शनों के बाद प्राची राष्ट्रीय एथलेटिक्स सर्किट में पहचान बनाने लगीं।
2019 में अंतरराष्ट्रीय पदक से खुला बड़ा रास्ता
2019 प्राची के करियर के लिए निर्णायक साल रहा। दोहा में आयोजित एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारतीय महिलाओं की 4×400 मीटर रिले टीम ने रजत पदक जीता। इस टीम का हिस्सा प्राची भी थीं।
इसी वर्ष अंतरराष्ट्रीय रेलवे एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भी उन्होंने कई पदक हासिल किए। 400 मीटर और 4×100 मीटर रिले में स्वर्ण तथा 800 मीटर में रजत पदक उनके खाते में आया। इस प्रदर्शन के बाद भारतीय एथलेटिक्स में उनका कद लगातार बढ़ता गया।
2023 में एशियन गेम्स का रजत बना करियर का बड़ा पड़ाव
हांगझोउ में हुए एशियन गेम्स में भारतीय महिला 4×400 मीटर रिले टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। प्राची इस टीम का हिस्सा थीं और भारत ने रजत पदक जीता। कोरोना महामारी के कारण हांगझोउ एशियन गेम्स 2022 के बजाय 2023 में आयोजित हुए थे।
इसी अवधि में प्राची ने 400 मीटर में अपनी व्यक्तिगत क्षमता भी दिखाई। ऑल इंडिया रेलवे एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 52.40 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता।
पेरिस ओलंपिक के लिए भी भारतीय दल में जगह मिली
प्राची का अगला बड़ा पड़ाव 2024 का पेरिस ओलंपिक रहा। उनका चयन भारतीय 4×400 मीटर रिले टीम से जुड़े दल में हुआ। वह ओलंपिक के लिए भारतीय टीम का हिस्सा बनीं, लेकिन भारतीय महिला रिले टीम फाइनल में जगह नहीं बना सकी। ऐसे में प्राची को ओलंपिक ट्रैक पर दौड़ने का अवसर नहीं मिला।
इसके बावजूद ओलंपिक टीम का हिस्सा बनना उनके खेल करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हो गया।
2026 में लगातार पदक, फिर जापान में एशियन गेम्स का कांसा
2026 प्राची के लिए बेहद महत्वपूर्ण साल साबित हुआ। रांची में आयोजित राष्ट्रीय सीनियर एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उन्होंने 400 मीटर में कांस्य पदक हासिल किया। इसके बाद भुवनेश्वर में हुई राष्ट्रीय सीनियर एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उन्होंने 400 मीटर में स्वर्ण पदक जीता और 53.24 सेकंड का समय दर्ज किया।
इसके बाद अगस्त में भुवनेश्वर में आयोजित प्रतियोगिता में प्राची ने 400 मीटर में 52.57 सेकंड का अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय निकाला। लगातार बेहतर होते प्रदर्शन के बीच उन्हें एशियन गेम्स में भारतीय चुनौती का हिस्सा बनने का मौका मिला।
अब जापान के आइची-नागोया में 400 मीटर का कांस्य पदक उनके इसी निरंतर प्रदर्शन की अगली कड़ी है।
गांव की दौड़ से अंतरराष्ट्रीय पोडियम तक
प्राची की उपलब्धि का सबसे बड़ा पहलू यह है कि उनका खेल सफर सीमित संसाधनों के बीच शुरू हुआ और धीरे-धीरे देश के सबसे बड़े खेल मंचों तक पहुंचा। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से एशियन चैंपियनशिप, एशियन गेम्स और ओलंपिक तक पहुंचने के बाद अब उन्होंने व्यक्तिगत 400 मीटर में एशियन गेम्स पदक हासिल किया है।
प्राची की सफलता की खबर से झबीरण गांव के साथ सहारनपुर के खेल जगत में भी खुशी है। परिवार और ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों पहले गांव की सड़कों पर शुरू हुई उनकी दौड़ अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक तक पहुंच चुकी है।
एक नजर में प्राची का सफर
2017: राष्ट्रीय स्तर पर 400 मीटर में 56.65 सेकंड का प्रदर्शन।
2018: नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 400 मीटर का रजत; गुवाहाटी में 52.96 सेकंड का प्रदर्शन।
2019: एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 4×400 मीटर रिले का रजत; अंतरराष्ट्रीय रेलवे प्रतियोगिता में तीन पदक।
2023: हांगझोउ एशियन गेम्स में 4×400 मीटर रिले का रजत; रेलवे चैंपियनशिप में 400 मीटर का स्वर्ण और 52.40 सेकंड का प्रदर्शन।
2024: पेरिस ओलंपिक के भारतीय दल में शामिल; 4×400 मीटर रिले टीम फाइनल में नहीं पहुंची।
2026: रांची की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 400 मीटर का कांस्य, भुवनेश्वर में 400 मीटर का स्वर्ण, 52.57 सेकंड का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन और अब जापान में एशियन गेम्स का कांस्य।