PFI के 2 कथित सदस्यों को हाईकोर्ट से जमानत:4 साल से जेल में थे, ट्रायल की धीमी रफ्तार पर जताई नाराजगी


इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के दो कथित सदस्यों को जमानत दे दी है। ये सदस्य हिंदू धार्मिक नेताओं की हत्या की कथित साजिश और देश में भय फैलाने के आरोप में चार साल से अधिक समय से जेल में बंद थे। न्यायालय ने मुकदमे की धीमी गति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे समय तक हिरासत और ट्रायल में देरी से आरोपियों के शीघ्र सुनवाई के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है। 2021 से जेल में बंद, कोर्ट ने अपील स्वीकार की न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की खंडपीठ ने अंसद बदरुद्दीन और फिरोज की आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया। दोनों आरोपी 17 फरवरी 2021 से जेल में बंद हैं। न्यायालय ने पाया कि मुकदमे को जल्द पूरा करने के लिए पहले भी दो बार निर्देश दिए जा चुके थे। इसके बावजूद, 18 अभियोजन गवाहों में से अब तक केवल पांच की जिरह पूरी हो पाई है। गवाहों की गवाही के लिए कुल 95 तारीखें निर्धारित की गईं, जिनमें से 11 गवाहों की मुख्य परीक्षा पूरी हो चुकी है, लेकिन जिरह केवल पांच की ही हो सकी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले के एक प्रमुख गवाह की मुख्य परीक्षा पूरी होने के बाद उसकी जिरह 35 पन्नों तक पहुंच चुकी है, फिर भी वह पूरी नहीं हो सकी। अभियोजन पक्ष द्वारा गवाहों की गवाही जल्द पूरी कराने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने पर न्यायालय ने हैरानी जताई। ट्रायल में देरी का फायदा आरोपियों को मिला न्यायालय ने माना कि अभियोजन की निष्क्रियता का अप्रत्यक्ष लाभ आरोपियों को मिल रहा है। यूएपीए की धारा 43-डी(5) में जमानत के लिए कड़े प्रावधान होने के बावजूद, लंबे समय से लंबित ट्रायल और निकट भविष्य में इसके पूरा होने की संभावना न होने को देखते हुए दोनों को राहत दी गई। न्यायालय ने आरोपियों की रिहाई पर कई शर्तें लगाई हैं। इनमें एटीएस के समक्ष नियमित हाजिरी देना, अनावश्यक स्थगन की मांग न करना और मुकदमे की महत्वपूर्ण तारीखों पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहना शामिल है। ATS के सामने नियमित हाजिरी की शर्त अभियोजन के अनुसार, दोनों पर हिंदू धार्मिक संगठनों के कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों की हत्या की साजिश रचने और धार्मिक कार्यक्रमों में विस्फोट कर समाज में भय पैदा करने की योजना में शामिल होने का आरोप है। एटीएस ने दोनों को फरवरी 2021 में गिरफ्तार किया था। अभियोजन का दावा है कि उनके कब्जे से पिस्तौल, छह कारतूस, विस्फोटक सामग्री और मलयालम में लिखी डायरी समेत अन्य सामान बरामद हुआ था।

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