Farrukhabad Flood Alert | Ganga River Above Danger Mark Updates

फर्रुखाबाद, बिजनौर, गोंडा3 मिनट पहले

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हम लोगों ने पैसा जोड़कर अपना घर बनवाया था। 1-2 लाख रुपए खर्च किए लेकिन एक झटके में पूरा मकान बह गया। हम लोग कहां रहेंगे, जैसे हमारा घर गंगा में समाया है, हम लोग भी गंगा में समा जाते हैं। यही रास्ता बचा है। और कहां जाएं हम लोग, आप ही बता दो। ये कहना है फर्रुखाबाद के दिलीप की मढैया गांव की रहने वाली तारा देवी का।

इसी गांव की रहने वाली संतूरी का कहना है, हम लोग भूखे-प्सासे मरा करते हैं। रिश्तेदार-नातेदार कुछ ले आते हैं तो खा लेते हैं। घर तो पूरा बह ही गया है। सड़क पर कहीं भी सो जाते हैं। बहुत खराब स्थिति है हम लोगों की।

ग्रामीण शीला का कहना है, हम लोग बहुत डरे रहते हैं। लगातार गंगा का पानी बढ़ रहा है। बच्चों के साथ यहां रहना मुश्किल हो रहा है। हम लोग खाने-पीने के लिए परेशान हो रहे हैं।

बता दें, फर्रुखाबाद में 21 मकान गंगा में बह गए हैं। भास्कर रिपोर्टर 1 किलोमीटर मोटर बोट से सफर कर दिलीप की मढैया गांव पहुंचा था।

गंगा में अपने घर बह जाने के बाद सड़क पर बैठकर महिलाएं रोती रहीं।

गंगा में अपने घर बह जाने के बाद सड़क पर बैठकर महिलाएं रोती रहीं।

पूरे प्रदेश के मैदानी इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ा

उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और बैराजों से छोड़े पानी की वजह से गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। हरिद्वार बैराज से डिस्चार्ज किए गए पानी और नरोरा बैराज से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी की वजह से पूरे प्रदेश के मैदानी इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

यूपी के फर्रुखाबाद, बिजनौर और गोंडा में बाढ़ की स्थिति बन रही है। कैसे हैं इन जिलों के हालात, लोग कैसे अपना जीवन यापन कर रहे हैं और प्रशासन ने इन जिलों में क्या व्यवस्था की है, इस रिपोर्ट में पढ़िए।

फर्रुखाबाद के 36 गांव बाढ़ से प्रभावित

फर्रुखाबाद में गंगा नदी उफान पर है। यहां बाढ़ का प्रकोप जारी है। वर्तमान में गंगा नदी चेतावनी बिंदु से 136.85 मीटर ऊपर बह रही हैं। यानी चेतावनी बिंदु से 25 सेंटीमीटर गंगा का जलस्तर बढ़ा है। जबकि खतरे का निशान 137.10 मीटर पर है।

शहर से 10 किलोमीटर दूर जनपद की तीनों तहसीलों के 36 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। जिसमें फर्रुखाबाद सदर तहसील के 9 गांव, कायमगंज तहसील के 13 गांव और अमृतपुर तहसील के 14 गांव प्रभावित हैं। सदर तहसील के 461 परिवार, कायमगंज तहसील के 1203 परिवार और अमृतपुर तहसील के 4061 परिवार बाढ़ से प्रभावित है। फर्रुखाबाद में कुल 5725 परिवार बाढ़ से प्रभावित हैं।

प्रशासन ने ऐसी बाढ़ चौकियां पीड़ितों के लिए बनवाई है।

प्रशासन ने ऐसी बाढ़ चौकियां पीड़ितों के लिए बनवाई है।

फर्रुखाबाद में 21 मकान गंगा में समाए

फर्रुखाबाद की सदर तहसील के अंतर्गत दिलीप की मढैया गांव में गंगा बीते 6 दिन से कटान कर रही है। यहां अब तक 21 मकान गंगा में समा चुके हैं। इस गांव की आबादी करीब 400 है। बाढ़ से परेशान लोग खुद ही अपना मकान तोड़कर ईंट और सरिया निकाले ले रहे हैं। उनका कहना है, यही सामान वह लोग फिर से मकान बनाने में यूज कर लेंगे। इस गांव तक जाने के लिए बिलावलपुर गांव से मोटर बोट और नाव का सहारा लेना पड़ता है। करीब 1 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।

अपने भाई की मदद करने आई हूं- फूलन देवी

दूसरी ग्रामीण फूलन देवी का कहना है, मैं यहां पर अपने भाई की मदद करने आई हूं। उसका मकान कटान में जा रहा है। तो हम लोग मकान को खुद तोड़कर उसकी ईंट और सरिया निकाले ले रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने यह भी बताया कि प्रशासन ने जो बाढ़ चौकियां स्थापित की हैं, वहां पर बढ़िया व्यवस्था हो रखी है।

ग्रामीणों के पूरे-पूरे मकान गंगा में बह गए।

ग्रामीणों के पूरे-पूरे मकान गंगा में बह गए।

बाढ़ से बचने के लिए प्रशासन ने की तैयारियां

फर्रुखाबाद में 24 अस्थाई बाढ़ शरणालय बनाए गए हैं। कायमगंज तहसील में मंडी समिति शमशाबाद, सदर तहसील में रहमानिया गर्ल्स इंटर कॉलेज और मंडी समिति में राजेपुर में बने रामनिवास डिग्री कॉलेज में बाढ़ शरणालय बनाया गया है। यहां अभी 4ॉ23 व्यक्ति रह रहे हैं। इनको सुबह-शाम खाना दिया जाता है। इसके अलावा चाय के साथ नाश्ता भी दिया जाता है। कुछ ग्रामीण अपने रिश्तेदारों या फिर दूसरे घरों में भी चले गए हैं। साथ ही 40 पशु राहत शिविर भी लगाए गए हैं।

प्रशासन ने मोटर बोट भी लगवाई

फर्रुखाबाद की सदर तहसील के 9 गांव में 18 नाव और 2 मोटर बोट लगाई गई हैं। कायमगंज तहसील क्षेत्र के 13 गांवों में 17 नाव और चार मोटर बोटों को लगाया गया है। जबकि अमृतपुर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत 14 गांवों में 16 नाव और चार मोटर बोट लगाई गई है।

इसके अलावा बचाव कार्य के लिए एनडीआरफ और एक कंपनी फ्लड पीएसी मोटर बोट के साथ तैनात है। 53 गोताखोरों को भी तैनात किया गया है। बता दें, बदायूं फर्रुखाबाद मार्ग पर भी बाढ़ का पानी भर गया है।

बिजनौर में ग्रामीणों ने लकड़ी का रास्ता चलने के लिए बनाया है।

बिजनौर में ग्रामीणों ने लकड़ी का रास्ता चलने के लिए बनाया है।

बिजनौर में रोड बही लोगों ने लकड़ी का रास्ता बनाया

पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश और चौधरी चरण सिंह बैराज से छोड़े जा रहे भारी मात्रा में पानी के कारण गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। गुरुवार को गंगा में 10 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। वहीं शुक्रवार को जलस्तर 20 सेंटीमीटर और बढ़ गया। इसके बाद गंगा का गेज 200.65 मीटर पर पहुंच गया है।

नदी अभी खतरे के निशान 202 मीटर से सिर्फ 1.35 मीटर नीचे है। जलस्तर बढ़ने के बाद बाढ़ खंड विभाग की टीमों ने सक्रियता बढ़ा दी है। अधिकारियों ने तटबंधों का मुआयना शुरू कर दिया है। सभी बाढ़ चौकियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। वहीं चांदपुर तहसील क्षेत्र के खादर इलाके में पांडवनगर चोकी के पास रोड गंगा के पानी से बह गई। स्थानीय लोगों ने आवाजाही को लेकर इस पर लकड़ी का रास्ता बनाया है।

पशुओं के लिए नहीं बचा चारा

कर्मचारियों को 24 घंटे तटबंधों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। गंगा का पानी बढ़ने से खादर क्षेत्र में दिक्कतें शुरू हो गई हैं। खेतों में खड़ी फसलें पानी में गलने लगी हैं। किसानों के सामने पशुओं के लिए हरे चारे का संकट खड़ा हो गया है।किसान अपने मवेशियों को चारा नहीं दे पा रहे हैं। बाढ़ खंड अधिकारियों का कहना है कि बैराज से पानी की निकासी लगातार जारी है। ऐसे में अगले 24 घंटे में जलस्तर और बढ़ सकता है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

गांव में पानी भरा होने की वजह से ग्रामीण नाव से सफर कर रहे हैं।

गांव में पानी भरा होने की वजह से ग्रामीण नाव से सफर कर रहे हैं।

इन गांवों की फसलें डूबीं

गंगा का जलस्तर बढ़ने से ओसीता जगदेवपुर, कबीरपुर आदि सहित टापू पर बसे गांव के किसानों की हजारों बीघा फसलें डूब गई हैं। धान और सब्जियों की छोटी फसलें तो पहले ही बर्बाद हो चुकी हैं। वहीं ईख और हरे चारे में भी कई दिन से पानी भरा होने के कारण फसलों पर पीलापन आने लगा है।

गोंडा में लोग पलायन को मजबूर

गोंडा में घाघरा नदी खतरे के निशान से 12 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जिसके चलते नवाबगंज थाना क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों का अस्थाई फूस का मकान नदी में समा गया है। वहीं लगभग 15 परिवार पलायन करके सुरक्षित स्थान पर और अपने रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं।

7 जुलाई से 31 जुलाई तक घाघरा नदी में 67 लाख 23 हजार 823 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। 1 अगस्त से 9 अगस्त तक कुल 55 लाख 58 हजार 769 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। घाघरा नदी 7 जुलाई 2026 को 1.35 मीटर खतरे के निशान से नीचे बह रही थी।

गोंडा में धीरे-धीरे पूरे गांवों का कटान हुआ जा रहा है।

गोंडा में धीरे-धीरे पूरे गांवों का कटान हुआ जा रहा है।

किसानों की फसल घाघरा में बही

वहीं 9 अगस्त को घाघरा नदी वर्तमान समय में खतरे के निशान से 12 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। कर्नलगंज और तरबगंज तहसील क्षेत्र में अब तक घाघरा नदी ढाई सौ बीघा से अधिक किसानों की फसल और उपजाऊ जमीनों का कटान कर चुकी है।

फसल बर्बाद होने वाले किसानों का कहना है, हम लोग ने 14-14 बीघा फसल लगाई थी लेकिन 4 बीघा से भी कम फसल हमें मिल पाई है। बाकी सारी फसल घाघरा में बह गई। हम लोगों का बहुत नुकसान हुआ है।

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