SGPGI Lucknow Facial Pain Treatment

SGPGI के पेन क्लीनिक में चेहरे के असहनीय दर्द से जूझ रही गीता का सफल इलाज हुआ है।

चेहरे के तेज दर्द से परेशान दो महिलाओं का कई साल से न्यूरो की बीमारी समझकर इलाज चल रहा था। दवाओं के साथ एक महिला की सर्जरी भी हुई, लेकिन दर्द फिर लौट आया। SGPGI के पेन क्लिनिक में जांच हुई तो पता चला कि दर्द की असली वजह चेहरे की नस नहीं, बल्कि गर्दन

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बिजली के झटके जैसा दर्द, सर्जरी के बाद भी नहीं मिली राहत

रायबरेली की 45 वर्षीय कमला देवी कई साल से चेहरे के एक तरफ तेज दर्द से परेशान थीं। दर्द बिजली के झटके जैसा होता था। खाना-पीना और बोलना भी मुश्किल हो गया था। कई अस्पतालों में इलाज कराया। उन्हें चेहरे की नस से जुड़ी बीमारी बताकर दवाएं दी गईं। एक बार सर्जरी भी हुई, लेकिन कुछ महीने बाद दर्द फिर शुरू हो गया।

रायबरेली निवासी कमला देवी कई सालों से चेहरे के दर्द से जूझ रही थी।

रायबरेली निवासी कमला देवी कई सालों से चेहरे के दर्द से जूझ रही थी।

इसके बाद वह SGPGI के पेन क्लिनिक पहुंचीं। जांच में पता चला कि उनकी गर्दन में एक नस दबी हुई है। इसी वजह से चेहरे तक लगातार दर्द के संकेत पहुंच रहे थे। डॉक्टरों ने नाक के पीछे की एक नस पर पल्स्ड रेडियोफ्रीक्वेंसी की। इसके बाद उन्हें लंबे समय तक राहत मिली।

कान और जबड़े के पास दर्द, जांच में दूसरी वजह सामने आई

अयोध्या की 51 वर्षीय गीता पांडे को कान, जबड़े और कनपटी के आसपास एक तरफ दर्द रहता था। ठंडी हवा लगने, छूने या कुछ चबाने से दर्द बढ़ जाता था। उनका भी पहले चेहरे की नस से जुड़ी बीमारी समझकर इलाज किया गया, लेकिन स्थायी राहत नहीं मिली।

SGPGI में जांच के बाद पता चला कि उन्हें कान के पास की नस में दर्द की समस्या है। इसकी वजह भी गर्दन में दबी नस से जुड़ी थी। डॉक्टरों ने कान के सामने वाली नस पर रेडियोफ्रीक्वेंसी प्रक्रिया की। इसके बाद वह सामान्य काम करने लगीं।

डॉ. सुजीत गौतम ने बताया कि पेन क्लीनिक में मरीजों को दर्द से मिल रही राहत।

डॉ. सुजीत गौतम ने बताया कि पेन क्लीनिक में मरीजों को दर्द से मिल रही राहत।

बिना चीरा लगाए किया इलाज

पेन क्लिनिक में दोनों महिलाओं का इलाज दो चरणों में किया गया। पहले अल्ट्रासाउंड की मदद से गर्दन में दबी नस के आसपास दवा का घोल डाला गया। इससे नस को मांसपेशियों की चिपकन से अलग किया गया। इसमें चीरा या टांका नहीं लगाया गया।

इसके बाद चेहरे में दर्द पहुंचाने वाली नस पर पल्स्ड रेडियोफ्रीक्वेंसी की गई। इसमें नस को काटा या जलाया नहीं जाता। नियंत्रित तरंगों से नस की ज्यादा सक्रियता कम की जाती है। प्रक्रिया में करीब 15 से 20 मिनट लगते हैं और मरीज को उसी दिन घर भेज दिया जाता है।

पेन क्लिनिक के प्रो.सुजीत गौतम ने कहा कि चेहरे का दर्द इलाज के बाद भी ठीक नहीं हो रहा है तो दोबारा जांच करानी चाहिए। ऐसे मरीज विशेषज्ञ पेन क्लिनिक में दिखा सकते हैं। पेन क्लिनिक: डी ब्लॉक, नवीन ओपीडी, कमरा नंबर 31 और 32। सोमवार से शुक्रवार सुबह 9 से शाम 5 बजे तक और शनिवार सुबह 9 से दोपहर 1 बजे तक।

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