बिना ऑपरेशन रीढ़ और घुटने का दर्द ठीक होगा:कानपुर में जुटे देश भर के फिजियोथेरेपिस्ट, बोले-मोबाइल और सिटिंग जॉब ने बढ़ाईं स्पाइन प्राॅब्लम


शहर के एक होटल में रविवार शाम 8 बजे आईएपी कानपुर सेंट्रल ब्रांच ने फिजियोथेरेपिस्ट थेरेपी एवं चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष सतीश मान ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तेजी से बढ़ रही रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) और घुटने (नी) की समस्याओं पर गंभीर चर्चा की गई। कार्यक्रम के आयोजक व वरिष्ठ फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. सुधीर कुमार द्विवेदी ने बताया कि, इस बड़े आयोजन में कानपुर और आसपास के इलाकों से लगभग 200 फिजियोथेरेपिस्ट एक मंच पर इकट्ठा हुए। दिल्ली, लखनऊ मेदांता और अपोलो के डॉक्टरों ने दिए टिप्स इस खास चिकित्सा सत्र में देश के नामी अस्पतालों के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने शिरकत की। इनमें दिल्ली, लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल, अपोलो और अलीगढ़ से आए नामचीन डॉक्टरों ने शिरकत की। इन विशेषज्ञों ने स्थानीय फिजियोथेरेपिस्ट के साथ स्पाइन और घुटनों के इलाज की आधुनिक तकनीकों और नई जानकारियों को साझा किया, ताकि मरीजों को और बेहतर इलाज मिल सके। कोशिश यही कि मरीज को न कराना पड़े ऑपरेशन बढ़ती समस्याओं पर बात करते हुए डॉ. सुधीर कुमार द्विवेदी ने कहा कि आज के समय में लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल चुकी है। हमारा मुख्य उद्देश्य यही रहता है कि फिजियोथेरेपी के माध्यम से मरीज को इस हद तक ठीक कर दिया जाए कि उसे ऑपरेशन कराने की नौबत ही न आए। उन्होंने बताया कि फिजियोथेरेपिस्ट डॉक्टरों द्वारा मरीजों को ऑपरेशन के पहले और ऑपरेशन के बाद, दोनों ही स्थितियों में प्रभावी फिजियोथेरेपी दी जाती है, जिससे बिना सर्जरी के भी बेहतरीन परिणाम मिल रहे है। मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल और लगातार बैठना बन रहा बीमारी की वजह विशेषज्ञों ने आज की लाइफस्टाइल को लेकर चिंता जताते हुए एक बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सुबह से लेकर शाम तक की व्यस्त जिंदगी, घंटों लगातार बैठकर काम करना (सिटिंग जॉब) और मोबाइल का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने की वजह से युवाओं में स्पाइन की दिक्कतें तेजी से बढ़ रही हैं।

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