कुत्तों के अलर्ट देते ही जंगल भाग जाते थे ठग:झांसी में CBI की तरह पुलिस ने रेड मारी, 23 गिरफ्तार; गांवों में फर्जी थाना बनाया था


झांसी के कटेरा थाना क्षेत्र के साइबर ठगी के हॉटस्पॉट बन चुके मौरयाना, खैरयाना और कडोर गांव में पुलिस ने ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स विभाग की तर्ज पर बड़ी कार्रवाई की। शुक्रवार रात करीब 2 बजे 200 पुलिसकर्मी और अधिकारी निजी व पुलिस बसों से तीनों गांवों में एक साथ पहुंचे। पुलिस के गांव में पहुंचते ही आरोपियों के घरों के बाहर बंधे कुत्ते भौंकने लगे। यही कुत्ते साइबर ठगों के लिए पुलिस के आने का अलर्ट सिस्टम बने हुए थे। पहले 2 तस्वीर देखिए… पुलिस के मुताबिक, कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनकर कई आरोपी घरों की छतों से पिछले रास्ते की ओर भागने लगे। लेकिन इस बार पुलिस पहले से ही गांव से बाहर निकलने वाले रास्तों की घेराबंदी कर चुकी थी। लिहाजा भागने की कोशिश कर रहे आरोपी पुलिस के हाथ लग गए। आरोपी अलर्ट हुए, भागने नहीं पाए पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि जब भी पुलिस उन्हें पकड़ने के लिए गांव में आती थी तो घरों के बाहर बंधे कुत्ते अनजान लोगों को देखकर भौंकने लगते थे। कुत्तों के भौंकने की आवाज उनके लिए पुलिस के आने का अलर्ट होती थी। इसके बाद आरोपी घरों से निकलकर छतों और पिछले रास्तों के जरिए भाग जाते थे। पुलिस ने इस बार आरोपियों के इसी अलर्ट सिस्टम का तोड़ निकाला। गांव में प्रवेश करने के साथ ही पुलिस ने बाहर निकलने वाले सभी रास्तों को घेर लिया। इससे आरोपी भाग नहीं सके। 80 शिकायतों से तैयार हुआ गांवों का पूरा नक्शा
सेंट्रल साइबर क्राइम पोर्टल पर मिली करीब 80 शिकायतों के आधार पर एएसपी अरीबा नोमान ने कटेरा क्षेत्र के इन तीन गांवों को साइबर ठगी का हॉटस्पॉट मानते हुए ऑपरेशन की रणनीति तैयार की। मौरयाना, खैरयाना और कडोर गांवों का पूरा नक्शा तैयार किया गया। इसी नक्शे के आधार पर तय किया गया कि किस रास्ते से पुलिस गांव में दाखिल होगी और किन रास्तों को पहले घेरा जाएगा।
इसके बाद आठ सर्किल ऑफिसर की टीम के साथ करीब एक महीने तक गांवों की निगरानी की गई। दबिश की जानकारी बेहद गोपनीय रखी गई। ऑपरेशन की सूचना केवल संबंधित सर्किल ऑफिसरों को दी गई, ताकि पुलिस की योजना आरोपियों तक न पहुंच सके। रात 2 बजे 200 पुलिसकर्मी पहुंचे शुक्रवार रात करीब 2 बजे पुलिस और निजी बसों से करीब 200 पुलिसकर्मी व अधिकारी एक साथ तीनों गांवों में पहुंचे। एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति के मुताबिक, पुलिस के पहुंचते ही आरोपियों के घरों के बाहर बंधे कुत्ते भौंकने लगे। पुलिस को पहले से अंदेशा था कि आरोपी कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनकर भागने की कोशिश करेंगे। इसी वजह से गांव में पहुंचने से पहले ही बाहर निकलने वाले सभी रास्तों पर पुलिस टीमें तैनात कर दी गई थीं। कुत्तों के भौंकने के बाद कई आरोपी छतों और पीछे के रास्तों से निकलने लगे, लेकिन घेराबंदी के चलते उन्हें पकड़ लिया गया। एमपी बॉर्डर का भी उठाते थे फायदा मौरयाना, खैरयाना और कडोर गांव मध्य प्रदेश की सीमा से सटे हैं। इसके अलावा गांवों के आसपास घना जंगल भी है। पुलिस के मुताबिक साइबर ठग इसी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर पुलिस से बचते थे। पुलिस की दबिश की भनक लगते ही आरोपी जंगल और मध्य प्रदेश की सीमा की ओर निकल जाते थे।
इस बार भी दबिश के दौरान 17 आरोपी मध्य प्रदेश की ओर निकल गए, जिसके कारण पुलिस की पहुंच से बाहर हो गए। हालांकि, पुलिस की ओर से बाकी आरोपियों को पकड़ने के लिए कार्रवाई जारी रखी गई। ठगी के पैसे से प्लॉट और सोना खरीदते थे
पुलिस की शुरुआती जांच में गिरफ्तार 23 आरोपियों की निशानदेही पर करीब 70 लाख रुपये कीमत के मोबाइल फोन, सोना और चांदी बरामद किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी ठगी की रकम घर में रखने के बजाय उससे जमीन के प्लॉट और सोना-चांदी खरीदते थे। जांच में मुख्य आरोपी लक्ष्मण यादव और सत्यम यादव द्वारा साइबर ठगी की रकम से प्रॉपर्टी खरीदने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस अब इन संपत्तियों और ठगी से अर्जित रकम के संबंध में भी जांच कर रही है। 23 आरोपी गिरफ्तार, नेटवर्क की जांच जारी
साइबर ठगी के इस नेटवर्क में पुलिस अब तक 23 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से साइबर ठगी के जरिए रकम जुटा रहे थे। अब पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ठगी की रकम से बनाई गई संपत्तियों का पता लगाने में जुटी है।

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