रांची38 मिनट पहले
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झारखंड की राजधानी रांची में JPSC और JSSC पेपर लीक को लेकर पिछले 10 दिनों से छात्रों का प्रदर्शन जारी है। रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर की तर्ज पर आंदोलन कर रहे हैं।
छात्रों की मांग है कि JPSC और JSSC की परीक्षाएं रद्द की जाएं और पेपर लीक करने वालों पर कार्रवाई की जाए। अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए छात्रों ने मशाल जुलूस समेत कई तरह के प्रदर्शन किए हैं।
10 दिन बीत जाने के बाद राज्य सरकार छात्रों से बातचीत के लिए तैयार हुई है। सरकार ने इसके लिए एक कमेटी बनाने का निर्णय लिया है। हालांकि, हेमंत सरकार का कोई भी प्रतिनिधि अब तक छात्रों से बातचीत करने नहीं पहुंचा है।
मंच ने 6 अगस्त को विधानसभा मार्च का आह्वान किया है। आंदोलनकारियों का दावा है कि बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और गुजरात समेत कई राज्यों से छात्रों और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिल रहा है।
छात्रों के आंदोलन की तस्वीरें देखें…

झारखंड की राजधानी रांची का जयपाल सिंह स्टेडियम बीते 10 दिनों से छात्र आंदोलन का केंद्र बना हुआ है।

यहां छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर में हुए प्रदर्शन की तर्ज पर आंदोलन कर रहे हैं।

ये छात्र झारखंड में JPSC-JSSCपरीक्षाओं के में हुई कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।

अब 10 दिनों के बाद राज्य सरकार इनके बात करने को तैयार हुई है।

छात्रों ने अपने इस आंदोलन से पॉलिटिकल पार्टियों की सीधी एंट्री बैन कर रखी है। इतना ही नहीं छात्रों ने अपने लिए खुद से एक कोड ऑफ कंडक्ट बना रखा है।
छात्रों ने खुद का बना रखा है संविधान
दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन की तर्ज पर यहां भी आंदोलन हो रहा है, लेकिन यह आंदोलन कुछ मायनों में अलग है। पिछले 10 दिनों में न तो छात्र उग्र हुए, न बयानबाजी हुई और न ही लाठीचार्ज की नौबत आई।
इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि छात्रों ने अपने आंदोलन में राजनीतिक दलों की सीधी एंट्री पर रोक लगा रखी है। इतना ही नहीं, छात्रों ने अपने लिए एक कोड ऑफ कंडक्ट भी तय किया है।
इस कोड ऑफ कंडक्ट के तहत छात्र चार बातों का विशेष ध्यान रख रहे हैं। मंच से राजनीतिक, धार्मिक या जातिगत बयानबाजी नहीं होगी। वक्ता केवल आंदोलन के मूल मुद्दों पर ही बोलेंगे।
किसी व्यक्ति विशेष पर व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाए जाएंगे और भाषण के दौरान अपशब्दों के प्रयोग से भी बचा जाएगा। आंदोलन के दौरान इन नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की गई है।


देवेंद्रनाथ महतो के भूख हड़ताल का तीसरा दिन
वहीं, JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच के नेता देवेंद्र महतो ने लगातार तीसरे दिन भी भूख हड़ताल जारी रखी। तबीयत बिगड़ने के बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखने की बात कही। उन्होंने घोषणा की कि आज की भूख हड़ताल दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन को समर्पित रहेगी।

JPSC-JSSCअभ्यर्थी न्याय मंच के नेता देवेंद्र महतो ने लगातार तीसरे दिन भी भूख हड़ताल जारी रखी।
छात्रों के सपोर्ट में उतरी CJP
JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ धरने पर बैठे छात्रों को अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का भी समर्थन मिल गया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आंदोलनरत छात्रों से बातचीत करने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि CJP झारखंड के छात्रों के समर्थन में है और उनकी मांगों का समर्थन करती है।
छात्रों को समर्थन देते हुए अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने झारखंड में आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों से बात की है। उन्होंने कहा कि CJP इस लड़ाई में पूरी तरह छात्रों के साथ है और उनकी सभी जायज मांगों का समर्थन करती है।
वहीं, CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि उनका संगठन झारखंड के युवाओं के साथ मजबूती से खड़ा है।
गुजरात -दिल्ली से ऑनलाइन बुक हो रहा खाना
छात्रों के धरना-सत्याग्रह आंदोलन को अब भारी जनसमर्थन मिलने लगा है। आंदोलनरत छात्रों को शुरुआत में रहने और खाना-पानी के खर्च की चिंता थी, लेकिन अब वे काफी हद तक निश्चिंत हो गए हैं।
गुजरात और दिल्ली समेत कई जगहों से छात्रों के लिए ऑनलाइन खाना बुक कराया जा रहा है। डिलीवरी ब्वॉय लगातार आंदोलन स्थल पर खाना और पानी पहुंचा रहे हैं।
वहीं, चैती दुर्गा पूजा समिति पिछले पांच दिनों से लगातार छात्रों के भोजन की व्यवस्था कर रही है। इसके अलावा दर्जनों सामाजिक और अन्य संस्थाएं भी आंदोलनरत छात्रों की मदद में जुटी हैं।
दो तस्वीरें देखिए…

छात्रों के इस प्रदर्शन को देखते हुए स्विगी और जोमैटो ने उन्हें खाना भिजवाना शुरू कर दिया। नाश्ते में ब्रेड चाय और मस्क की व्यवस्था है।

बिहार, गुजरात और दिल्ली से छात्रों के केले और कई तरह फल भी भेजे जा रहे हैं।
ऐसे तय रखी है आंदोलन की रूपरेखा
दरअसल छात्रों का यह आंदोलन नहीं बल्कि सत्याग्रह है। वैसे तो यह छात्र आंदोलन है, लेकिन JPSC-JSSCरिफॉर्म मंच, आईसा और देवेंद्र महतो के नेतृत्व वाले अभ्यर्थी न्याय मंच ने अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए सरकार पर दबाव बनाया। इसी वजह से आंदोलन को अब राज्य के साथ-साथ दूसरे राज्यों से भी समर्थन मिलने लगा है।
अलग-अलग छात्रों के मंच ने अपने कार्यक्रम की रूप रेखा भी तय कर रखी है। JPSC-JSSCरिफॉर्म मंच के बैनर तले छात्र 10 अगस्त को विधानसभा मार्च की घोषणा की है। वहीं आईसा के कार्यकर्ताओं ने आज सांस्कृतिक कार्यक्रम और 7 अगस्त को विधानसभा मार्च का ऐलान किया है। इसमें दिल्ली में आंदोलन का चेहरा रही आईसा की अध्यक्ष नेहा बोरा भी शामिल होंगी।
3 तस्वीरें देखिए….

रांची में छात्रों का यह प्रदर्शन दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के जैसा है। छात्र JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक को लेकर धरना दे रहे हैं।

25 जुलाई से छात्रों ने यह आंदोलन शुरू हुआ था। 29 जुलाई से वे स्टेडियम में धरना देकर बैठे हैं। छात्रों की मांग है कि परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं की CBI से जांच कराई जाए।

JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते से इस मामले में लगातार पूछताछ की जा रही है।
अब जानिए सीएम हेमंत सोरेन ने क्या कहा-
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों की चिंताओं से पूरी तरह अवगत है और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा कि सरकार इस मामले को पूरी गंभीरता से देख रही है। मुख्यमंत्री ने कहा-
मैंने पहले भी कहा है कि सरकार की आंखें भी हैं, कान भी हैं और संवेदनशीलता भी है। हम कितनी गंभीरता के साथ इस चीज को देख रहे हैं, यह मैं सीना चीरकर तो नहीं दिखा सकता। जिस चीज के पीछे हम पड़ते हैं, उसे ठीक करके ही दम लेना हमारा उद्देश्य रहा है। जिस तरह से जांच दल दिन-रात एक करके काम कर रहा है, उसके जवाब का हमें इंतजार है। बहुत जल्द छात्रों और राज्य के लोगों को इस विषय पर अवगत कराया जाएगा।

विपक्ष लगातार उठा रहा है सवाल
इस मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी भी लगातार सरकार पर हमलावर हैं। उन्होंने दावा किया है कि भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं और इससे लाखों युवाओं के भविष्य पर असर पड़ा है।
मरांडी ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों और बिचौलियों के माध्यम से अभ्यर्थियों को नेपाल, बिहार और पश्चिम बंगाल ले जाया गया, जहां उन्हें संभावित सवाल याद कराए गए। उनका दावा है कि याद कराए गए कई सवाल परीक्षा में पूछे गए। हालांकि, इन आरोपों की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
