CM सामूहिक विवाह योजना के गद्दों पर TMC-डिजाइन का मामला:459 जोड़ों को बांटे गए थे; फर्म के खिलाफ धोखाधड़ी का केस, 3 नोटिस के बाद होगी अंतिम कार्रवाई


मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत नवविवाहित जोड़ों को वितरित किए गए गद्दों पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चुनाव चिह्न और झंडे जैसी डिजाइन मिलने के मामले में जिला समाज कल्याण विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। विभाग की ओर से आपूर्तिकर्ता फर्म से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन उसका जवाब अधिकारियों को संतोषजनक नहीं लगा। अब अंतिम अवसर देने के बाद फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी की जा रही है। यह विवाद 24 जुलाई को आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह के दौरान सामने आया। कार्यक्रम में 459 नवविवाहित जोड़ों को उपहार सामग्री वितरित की गई थी। इनमें शामिल गद्दों पर ‘TMC’ लिखा हुआ था और उन पर तृणमूल कांग्रेस के झंडे जैसी डिजाइन छपी थी। मामला सामने आने के बाद यह चर्चा का विषय बन गया और विभाग ने तत्काल जांच शुरू कर दी। अलीगढ़ की फर्म ने की थी गद्दों की आपूर्ति प्राथमिक जांच में पता चला कि गद्दों की आपूर्ति अलीगढ़ की मेसर्स इंडियन जनरल ट्रेडर्स ने की थी, जिसका पता पटवारी का नगर, बरौली रोड पुलिस चौकी के निकट बताया गया है। हालांकि जांच के दौरान फर्म के दिए गए पते और उसके वास्तविक अस्तित्व पर भी सवाल खड़े हुए हैं। जिला समाज कल्याण विभाग ने अलीगढ़ में फर्म के पंजीकरण और वास्तविक मौजूदगी की भी जांच शुरू करा दी है। पहला जवाब असंतोषजनक, अब अंतिम मौका जिला समाज कल्याण अधिकारी के अनुसार करीब एक सप्ताह पहले फर्म को ई-मेल के माध्यम से नोटिस भेजकर आरोपों पर स्पष्टीकरण मांगा गया था। फर्म ने जवाब तो दिया, लेकिन उसमें आरोपों का संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। विभाग के मुताबिक नियमानुसार फर्म को कुल तीन अवसर दिए जाएंगे। यदि अंतिम अवसर तक भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उसे काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डाल दिया जाएगा। धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज, संपर्क से भी बच रही फर्म इस मामले में आपूर्तिकर्ता फर्म के खिलाफ सदर कोतवाली में धोखाधड़ी का मुकदमा पहले ही दर्ज कराया जा चुका है। जांच के दौरान अधिकारियों ने फर्म के संचालक और कर्मचारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति सामने नहीं आया। एक बार फोन उठाने वाले व्यक्ति ने भी फर्म से अपना संबंध होने से इनकार कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है और यदि अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो ब्लैकलिस्टिंग के साथ अन्य वैधानिक कार्रवाई भी की जाएगी।

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