क्या 'कुत्ता-बिल्ली' वाला बयान फेक था?:बांकीपुर में बाजी पटलने वाले बयान की सच्चाई, प्रशांत किशोर से BJP हारी क्यों; 5 कारण


पटना का बांकीपुर…भाजपा का 30 साल पुराना अभेद्य किला 3 अगस्त को ढह गया। 51,936 वोटों से 9 महीना पहले जीतने वाली भाजपा अबकी बार कुल 51 हजार वोट तक नहीं पा सकी। प्रशांत किशोर ने 19,324 वोटों से BJP के नीरज सिन्हा को बुरी तरह हरा दिया। 1995 से नहीं हारने वाली BJP आखिर प्रशांत किशोर से कैसे हार गई, यह हार नितिन नवीन और सम्राट चौधरी के लिए बड़ा झटका क्यों है, जानेंगे; बूझे की नाही में…। BJP की हार के 5 बड़े कारण 1. जेन-Z: लाठीचार्ज का बदला ‘स्कूल का बस्ता’ पर बटन दबाकर लिया 3.79 लाख वोटरों वाली बांकीपुर विधानसभा में 53,419 यानी 14% वोटर 29 साल से कम उम्र वाले हैं। मतलब जेन-Z वोटर हैं। 20 जुलाई के बाद बांकीपुर एरिया में जेन-Z के बीच दो तरह के वीडियो सर्कुलेट किए गए। दिल्ली और पटना सहित बिहार में स्टूडेंट्स पर हुए लाठीचार्ज और गोली चलाने की घटना का वीडियो दिखाया गया। चूंकि पटना में जहां स्टूडेंट्स का प्रदर्शन हुआ, वह बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में ही पड़ता है। इसलिए इसका असर यहां के लोगों पर ज्यादा पड़ा। 2. UGC के नए नियम से नाराज सवर्णों ने बढ़ाई दूरी जनवरी में आए UGC इक्विटी रेगुलेशंस से सवर्ण समाज नाराज था। जहानाबाद NEET स्टूडेंट रेप-मर्डर केस और भरत तिवारी एनकाउंटर ने इस नाराजगी को और बढ़ा दिया। गैर कायस्थ सवर्णों (भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत) में नाराजगी वोटिंग के पहले और वोटिंग के दिन जमीन पर साफ दिख रही थी। इसकी भनक BJP को पहले से थी। यही कारण है कि भाजपा ने मैन टू मैन मार्किंग की। अपने सवर्ण नेताओं को गली-गली, सोसाइटी-सोसाइटी घूमाया। 40 स्टार प्रचारकों में से 15 सवर्ण रखे। अलग-अलग बैठकें की। 3. ‘कुत्ता-बिल्ली’ वाले कथित बयान से लोग भड़के पूरे चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा, ‘भाजपा के नेता कहते हैं कि बांकीपुर ऐसा इलाका है कि कुत्ता-बिल्ली को भी खड़ा करेंगे तो लोग हमें जीता देंगे।’ प्रशांत किशोर ने यह बातें हर सभा में कही। इससे लोगों का गुस्सा भड़क गया। भास्कर रिपोर्टर से भी कुछ लोगों ने वोटिंग के दिन इस बयान पर नाराजगी जाहिर की। इसका असर भाजपा के वोटों पर पड़ा। कुछ लोगों ने सबक सीखाने के लिए प्रशांत किशोर को वोट कर दिया। 4. प्रशांत किशोर की तुलना में नीरज सिन्हा कमजोर प्रत्याशी प्रशांत किशोर की तुलना में भाजपा के नीरज सिन्हा कमजोर प्रत्याशी थे। उनके सामने पूरे विधानसभा क्षेत्र में अपनी पहचान का संकट था। नीरज सिन्हा ना कैमरे के सामने कंफर्टेबल थे और ना मुद्दों पर उनकी कोई स्पष्ट राय थी। यही कारण है कि कई बार भाजपा के बड़े नेता उनको माइक के सामने आने से रोक रहे थे। 5. अंदरूनी खींचतान में हार गई भाजपा पॉलिटिकल सर्किल में चर्चा है कि बांकीपुर में भाजपा की यह हार पार्टी की दिल्ली और पटना की अंदरूनी खींचतान का नतीजा है। बांकीपुर में हार, सम्राट-नितिन नवीन के लिए झटका क्यों… बांकीपुर में प्रशांत किशोर की धमाकेदार जीत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के लिए बड़ा झटका है। इसे ऐसे समझिए… सम्राट चौधरी के खिलाफ प्रशांत खड़ी करेंगे एंटी इनकंबेंसी 15 अप्रैल को बिहार में भाजपा ने अपना पहला मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के रूप में बनाया है। इसके बाद यह पहला चुनाव था। जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने अपनी रणनीति और बयानों के जरिए इस चुनाव को सम्राट चौधरी वर्सेज प्रशांत किशोर बना दिया। वह लगातार जनसभा से लेकर मीडिया को दिए इंटरव्यू में कह रहे हैं- ‘यह सिर्फ एक सीट भर का चुनाव नहीं है, यह सम्राट चौधरी के नाम पर जनमत टेस्ट है। अगर यहां भाजपा हारी तो उसको मुख्यमंत्री बदलना होगा।’ 3 अगस्त को जीत के बाद प्रशांत किशोर ने फिर इस बात को दोहराया। उन्होंने कहा- ‘भाजपा को किसी ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाना चाहिए, जिसका आपराधिक चरित्र ना हो। कुशवाहा समाज से ही बनाए, लेकिन योग्य आदमी को बनाए।’ नितिन नवीन पर खड़े होंगे सवाल 1995 से यहां नितिन नवीन का परिवार जीत रहा था। इसे भाजपा और RSS का गढ़ माना जाता था। इतनी सुरक्षित सीट पर नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते पार्टी का हार जाना उनको मोरली डाउन करेगा।

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