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लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारी और इंजीनियर जिस कारोबारी से 7.50 लाख की घूस लेते पकड़े गए, उससे 40 लाख में डील हुई थी। कारोबारी ने दैनिक भास्कर से बताया- मेरा कॉम्प्लेक्स बनने के बाद किसी ने IGRS पर शिकायत की। उसके बाद मेरे ऊपर अधिकारियों का दबाव आने लगा। वहां से फोन कर-करके बोला जाने लगा कि 40 लाख दो तो शिकायत को बंद कर देंगे। अगर पैसा नहीं दिए तो बिल्डिंग पर बुलडोजर चला दिया जाएगा। कारोबारी NRI हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इन धमकियों से मैं काफी आहत हो गया था। 20 दिन से सो नहीं पा रहा था। मैंने भारत छोड़ने का फैसला कर लिया था। अपने वीजा की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। मुझे लगा कि यहां बिजनेस करना संभव नहीं दिख रहा है। कैसे विजिलेंस की टीम के हाथों पकड़वाया अधिकारियों को कारोबारी जितेंद्र नारायण ने बताया कि आरोपियों ने पहले ही उनसे करीब 70 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए थे। उनके पास इसका पूरा रिकॉर्ड मौजूद है। उन्होंने विजिलेंस को वॉट्सएप चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी उपलब्ध कराए हैं। कहा- 15 दिन पहले मैंने विजिलेंस से शिकायत की। विजिलेंस से मुझे आश्वासन मिला। विजिलेंस की ओर से बताया गया था कि रिश्वत मांगने वालों को गोमतीनगर में JPNIC के पास बुलवाइए। LDA अधिकारियों को आप पैसा दे रहे होंगे, उसी समय उन्हें रंगेहाथ पकड़ लिया जाएगा। अब पढ़िए कारोबारी ने जो बताया- लगा दोबारा विदेश लौटना पड़ेगा मामला इंदिरानगर में अमराई गांव स्थित नारायण कॉम्प्लेक्स का है, जहां करीब 50 दुकानों का व्यावसायिक परिसर तैयार किया गया है। कारोबारी का आरोप है कि निर्माण पूरा होने के बाद IGRS पोर्टल पर शिकायत कराई गई। इसके बाद एलडीए की टीम ने नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का डर दिखाकर रिश्वत मांगनी शुरू कर दी। पीड़ित कारोबारी जितेंद्र नारायण ने दैनिक भास्कर से कहा कि पिछले 20 दिनों से वह मानसिक तनाव में थे। उन्हें लगने लगा था कि भारत में ईमानदारी से कारोबार करना मुश्किल है। उन्होंने दोबारा विदेश लौटने का मन बना लिया था और वीजा की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी। मैंने सोचा था कि विदेशों में काफी काम कर लिया, अब अपने प्रदेश में निवेश करूंगा। लेकिन, जिस तरह मुझे परेशान किया गया, उससे लगा कि यहां कारोबार करना संभव नहीं है। बिचौलिये के फोन पर पहुंच जाते थे कर्मचारी जितेंद्र नारायण के मुताबिक, 16 जुलाई को एलडीए की टीम पहली बार उनके कॉम्प्लेक्स पर पहुंची। करीब एक सप्ताह बाद 24 जुलाई को फिर कार्रवाई की चेतावनी दी गई। इसके बाद लगातार फोन कॉल, आईजीआरएस शिकायतों और कार्रवाई के डर के जरिए उन पर दबाव बनाया जाने लगा। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रवण कुमार बार-बार फोन कर कहता था कि अगर रुपए नहीं दिए तो अगले दिन कॉम्प्लेक्स गिरा दिया जाएगा। उसके फोन के कुछ समय बाद एलडीए के कर्मचारी भी मौके पर पहुंच जाते थे। पहली किस्त के रूप में 7.50 लाख रुपए मंगाए कारोबारी का कहना है कि शुरुआत में 40 लाख रुपए मांगे गए। जब उन्होंने असमर्थता जताई तो रकम 25 लाख कर दी गई। बाद में 15 लाख रुपए में सौदा तय हुआ। पहली किस्त के रूप में 7.50 लाख रुपए देने के दौरान विजिलेंस ने पूरी कार्रवाई कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जितेंद्र नारायण का दावा है कि आरोपियों ने पहले ही उनसे करीब 70 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए थे। उनके पास इसका पूरा रिकॉर्ड मौजूद है। जितेंद्र नारायण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विजिलेंस की टीम का आभार जताया। कहा कि अपना कारोबार समेटकर लौटने वाले थे। फिजी से हॉन्ग-कॉन्ग तक कारोबार, यूपी में करना चाहते थे निवेश जितेंद्र नारायण ने बताया कि उनका कारोबार फिजी, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बैंकॉक, न्यूज़ीलैंड, चीन, हॉन्ग कॉन्ग और श्रीलंका समेत कई देशों में फैला हुआ है। वर्षों विदेश में काम करने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश में निवेश करने का फैसला लिया था। लखनऊ में करीब 10 हजार वर्गफीट का व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स बनाया, लेकिन कथित वसूली के कारण उनका भरोसा डगमगाने लगा। विजिलेंस से शिकायत के बाद बिछाया गया ट्रैप कारोबारी ने बताया कि उन्हें विजिलेंस के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि जल्द कार्रवाई होगी। करीब 15 दिनों तक पूरी योजना तैयार की गई। तय रणनीति के तहत पहली किस्त देते ही विजिलेंस ने जेई दिनेश कुमार वर्मा, सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश और श्रवण कुमार को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। समझिए कैसे चल रहा भ्रष्टाचार- IGRS पर बिचौलिये करते हैं शिकायत जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक पहले आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई जाती थी। फिर जांच के बाद शिकायतकर्ता की ओर से असंतोष जताकर दोबारा जांच शुरू कराई जाती। इसी प्रक्रिया के दौरान भवन स्वामी पर नोटिस, सीलिंग और बुलडोजर की कार्रवाई का दबाव बनाकर लाखों रुपए की रिश्वत मांगी जाती थी। इस दौरान आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत करने वाला ही बिचौलिया बनता था। या यूं कहें कि बिचौलिये ही आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत करते थे। उसके बाद एलडीए की टीम एक्टिव हो जाती थी। फिलहाल, विजिलेंस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। विजिलेंस अब यह पता लगाने में जुटी है कि रिश्वतखोरी का यह मामला केवल तीन आरोपियों तक सीमित था या एलडीए के भीतर किसी बड़े नेटवर्क के तहत आईजीआरएस शिकायतों के जरिए वसूली का खेल चल रहा था। जांच एजेंसी डिजिटल साक्ष्यों, बैंक लेनदेन, कॉल डिटेल और अन्य शिकायतों की भी पड़ताल कर रही है। एलडीए ने जेई और सुपरवाइजर को निलंबित किया विजिलेंस की कार्रवाई के बाद एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने आरोपी सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा के निलंबन की संस्तुति शासन को भेजी गई है। साथ ही प्रवर्तन अनुभाग में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक, आईजीआरएस शिकायतों की गहन जांच और पेशेवर शिकायतकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने जैसे निर्देश भी जारी किए गए हैं। —————————– संबंधित खबर भी पढ़िए- लखनऊ में 7.50 लाख रिश्वत लेते इंजीनियर गिरफ्तार : विजिलेंस ने 3 लोगों को रंगेहाथ पकड़ा, मकान बनवाने के बदले 15 लाख मांगे थे लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के जेई समेत 3 लोग 7.50 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़े गए। विजिलेंस ने शिकायतकर्ता के जरिए इन्हें पैसे देने के लिए बुलाया था। गोमती नगर के LDA के ऑफिस में जैसे ही आरोपियों ने पैसे लिए, टीम ने उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। जोन-5 ऑफिस में तैनात JE दिनेश कुमार वर्मा, सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश और बिचौलिए श्रवण कुमार ने शिकायतकर्ता को धमकाया था। उससे मकान निर्माण के बदले 15 लाख रुपए की डिमांड की थी। प्राधिकरण वीसी प्रथमेश कुमार ने मामला सामने आने के बाद जेई और सुपरवाइजर को निलंबित कर दिया है। (पूरी खबर पढ़िए)
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'40 लाख कह रहे थे, 15 लाख में आ गए':लखनऊ का NRI कारोबारी बोला- LDA अधिकारियों ने बुलडोजर चलाने की धमकी दी थी