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वाराणसी में साइबर क्राइम और भेलूपुर की पुलिस टीम ने महमूरगंज इलाके में एक रिहायशी बिल्डिंग में चल रहे शेयर ट्रेडिंग के नाम पर साइबर फ्राड के अड्डे का भांडाफोड़ गुरुवार की शाम किया था। शुक्रवार को कुल 32 आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया । वहां कोर्ट ने सभी गिरफ्तार महिला टेली कॉलर्स को 25-25 हजार के पर्सनल बांड पर रिहा कर दिया तो। 11 पुरुष आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। देश के कई लोगों को 1.25 करोड़ का चूना लगा चुके इस गिरोह को नैब करने के लिए पुलिस ने दो सिपाहियों को यहां जॉब सीकर बनाकर भेजा था। वहां क्या मिला और रेकी के दौरान क्या हुआ इन सब विषयों पर दैनिक भास्कर ने डीसीपी क्राइम नीतू कादयान और एक सिपाही से भी बात की। पढ़िए रिपोर्ट… साइबर क्राइम को मिली थी शिकायत डीसीपी काशी नीतू कादयान ने बताया – पकड़े गए लोगों पर एक छोटी सी शिकायत की गई थी। हमारा पैसा ट्रेडिंग के नाम पर महमूरगंज में चल रहे एक कॉल सेंटर ने ले लिया। इस पर हमने टीम लगाई तो पता चला यहां लड़के-लड़कियां आते हैं और SEBI रजिस्टर्ड का बोर्ड लगाकर यहां से कॉलिंग की जाती है। इसके बाद हमने इसका एक पूरा ऑपरेशन तय कर इसे नैब किया है। जिसमें हमने दो साइबर क्राइम के सिपाहियों को जॉब सीकर बनाकर यहां भेजा था। तीन दिन तक जाते रहे सिपाही, देखी कार्य शैली सिपाही से दैनिक भास्कर ने बात की तो उन्होंने बताया- जब साइबर क्राइम को सूचना मिली तो हमने पहले एनकेडी एन्ड एसोसिएट्स की पड़ताल की। इसका SEBI में रजिस्ट्रेशन चेक किया तो वह नंबर फेक निकला। तो फिर मैं और एक अन्य साथी बिहार का जॉब सीकर बनकर उनके ऑफिस पहुंचे। वहां हमें विनय मौर्या मिला। विनय ने हम दोनों का नाम पता पूछा और आने का कारण पूछा। तो हमने बताया की हम बहुत परेशान हैं, हमें जॉब चाहिए, हमने ग्रेजुएशन किया है। विनय मौर्य ने कहा जॉब है। तो हमने कल आने की बात कही और वहां से निकल लिए। ताकि उसे शक न हो। दूसरे दिन विनय ने 8 हजार की जॉब का ऑफर दिया सिपाही ने बताया- हम जब दूसरे दिन यानी मंगलवार को वहां पहुंचे तो कई इम्प्लाई भी हमारे पास आए और उन्होंने काम के बारे में बताया की अच्छा काम है बस फोन करना है और कुछ नहीं। वहां ही हमें पता चला की ऑफिस में सोमवार और गुरुवार को ज्यादा एम्प्लाई आते हैं। इस दिन भी विनय हमसे मिला और काम करने के लिए 8 हजार रुपए सेलरी और इंसेंटिव की बात किया। बोला कल आना तो काम समझाऊंगा। तीसरे दिन समझाया काम सिपाही ने बताया – दूसरे दिन हम लोग जब वहां पहुंचे तो बहुत कम एम्प्लाई ऑफिस में थे। इनमें लड़कियों की संख्या ज्यादा थी और सभी काल करने में व्यस्त थीं। कुछ देर बाद मास्टरमाइंड विनय आया और बोला की शेयर ट्रेडिंग के लिए लोगों को टिप्स देनी है। इसपर हमने कहा की हम लोग उसके लिए अथराइज़्ड परीक्षा पास नहीं है। वह बोला कोई बात नहीं हम करवा देंगे तुम काम शुरू करो। हमें एक स्क्रिप्ट दी गई और बताया गया की कॉलर को यही पढ़ कर बताना। हमने कल आने की बात कही और वहां से निकल लिए। सभी एविडेंस हमारे पास थे। लंच के बाद गुरुवार को हुई छापेमारी डीसीपी नीतू कादयान ने बताया – सिपाहियों ने वहां तीन दिन तक रेकी की इसके बाद हमने गुरुवार जिस दिन एम्प्लाई सबसे अधिक रहते हैं। उस दिन छापेमारी लंच के बाद की ताकि पूरी टीम मौके पर रहे। मौके से हम लोगों ने टेली कॉलिंग करने वाली 21 महिला और 9 पुरुष समेत कुल 32 लोगों को गिरफ्तार किया। मिर्जापुर, चंदौली और वाराणसी के रहने वाले हैं आरोपी डीसीपी ने बताया – ये सभी मिर्जापुर, चंदौली और वाराणसी के रहने वाले हैं। ये फर्जी तरीके से एक रिहायशी बिल्डिंग में एनकेडी एन्ड एसोसिएट्स के नाम से फर्म चलाते थे। जिसे सेबी से रजिस्टर्ड बताया जाता था। यहां काम करने वाले लोगों को 8 से 16 हजार रुपए तक सैलरी मिलती थी। ये शेयर ट्रेडिंग में निवेश के लिए टेलीकॉलिंग के जरिए ग्राहक फंसाते थे। उनसे निवेश करवाते थे। डीसीपी बोलीं- आरोपियों के पास शेयर ट्रेडिंग क्वालिफिकेशन नहीं डीसीपी नीतू कादयान ने बताया- पुलिस छापेमारी में मौके से 21 लड़कियां मिलीं। ये सभी लड़कियां टेलीकॉलिंग करती थीं। सभी ने स्वीकार किया कि उन्हें विज्ञापन के जरिए बुलाया गया था। इन्हें बताया गया कि हम सेबी की ओर से लाइसेंस प्राप्त संस्था हैं। किसी लड़की के पास शेयर ट्रेडिंग का कोई क्वॉलिफिकेशन नहीं है। एक ग्रेजुएट लड़का या लड़की बिना कोर्स बिना एक्सपीरियंस के सैलरी वाला मर्चेंट बनकर लोगों को काॅल करके फ्रॉड कर रहा है। ये उनको देखना चाहिए था किसी के पास किसी भी तरह का जॉब लेटर नहीं है। कंपनी में कोई एचआर नहीं, कोई रिसर्च टीम नहीं है। ये लोग कैसे काम कर रहे थे। लड़के-लड़कियों को सिर्फ एक फोन नंबरों की लिस्ट और एक स्क्रिप्ट दी गई थी। ये पीड़ित तब होतीं, जब इनके खाते से पैसा चुराया गया होता। ये खुद ही किसी से पैसा ले रहीं। तो ये अपराध में शामिल हो रही रही हैं। इन्हीं पैसों से सैलरी अकाउंट की जगह कैश में मिल रही थी।
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दो सिपाही जॉब सीकर बनकर पहुंचे, 3 दिन काम किया:8 हजार की जॉब हुई ऑफर, ऐसे पकड़ा गया साइबर फ्राॅड का बड़ा गिरोह