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मथुरा कोर्ट ने 2022 में हुई महिला की हत्या के मामले में आरोपी शैलेंद्र उर्फ शैलू को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 26 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला पुलिस की विवेचना और अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर सुनाया गया। जिला शासकीय अधिवक्ता शिवराम तरकर ने बताया कि घटना 2022 की है। शिकायतकर्ता बिजेंद्र सिंह अपने परिवार के साथ आगरा में एक शादी समारोह में गए थे। जब परिवार वापस लौटा तो उनकी मां घर के अंदर मृत मिलीं। घर अंदर से बंद था। इसके बाद थाना राया पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। बेटी के बयान से मिला अहम सुराग जांच के दौरान मृतका की बेटी गीता का बयान पुलिस के लिए अहम साबित हुआ। उसने बताया कि घटना वाली रात उसकी मां से फोन पर बात हुई थी। बातचीत के दौरान फोन पर गांव के शैलेंद्र उर्फ शैलू की आवाज सुनाई दी थी, जो उसकी मां से पानी मांग रहा था। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाए और आरोपी तक पहुंची। 12 गवाहों की गवाही के बाद दोषी करार अभियोजन पक्ष ने अदालत में 12 गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने शैलेंद्र उर्फ शैलू को हत्या का दोषी माना और उसे आजीवन कठोर कारावास के साथ 26 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत मिली सफलता जिला शासकीय अधिवक्ता शिवराम तरकर ने कहा कि मथुरा पुलिस की सटीक विवेचना और अभियोजन की प्रभावी पैरवी के चलते मामले में दोषसिद्धि हो सकी। उन्होंने बताया कि यह फैसला पुलिस के ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत मिली महत्वपूर्ण सफलता है। वहीं, अदालत के फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने इसे न्याय की जीत बताया।
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मथुरा में महिला की हत्या के दोषी को उम्रकैद:₹26 हजार का जुर्माना, बेटी ने फोन पर सुनी थी हत्यारे की आवाज