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उन्नाव में गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद पानी प्रमुख घाटों तक पहुंच गया है। हालांकि गुरुवार को इसमें गिरावट दर्ज की गई, लेकिन तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखते हुए संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, रविवार शाम को गंगा का जलस्तर 110.910 मीटर था, जो सोमवार सुबह बढ़कर 110.990 मीटर और फिर 111.020 मीटर तक पहुंच गया। मंगलवार को यह 111.020 मीटर और बुधवार दोपहर 111.050 मीटर दर्ज किया गया। गुरुवार सुबह 10 बजे जलस्तर में लगभग 13 सेंटीमीटर की गिरावट आई और यह 110.850 मीटर रिकॉर्ड किया गया। इस समय शुक्लागंज में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 112 मीटर से करीब 85 सेंटीमीटर नीचे है। खतरे का निशान 113 मीटर निर्धारित है। हालांकि जलस्तर चेतावनी स्तर से नीचे है, फिर भी लगातार बढ़ते पानी के कारण नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में रहने वाले लोग सतर्क हो गए हैं। घाटों तक पानी पहुंचने से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि हरिद्वार, नरौरा और गंगा बैराज सहित पश्चिमी बांधों से छोड़ा जा रहा पानी और उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपरी क्षेत्रों में हो रही बारिश जलस्तर बढ़ने का प्रमुख कारण है। यदि आने वाले दिनों में बारिश का सिलसिला जारी रहता है और बांधों से पानी छोड़ा जाता रहा तो गंगा का जलस्तर दोबारा बढ़ सकता है। शुक्लागंज और आसपास के तटीय क्षेत्रों में गंगा का पानी धीरे-धीरे निचले हिस्सों की ओर बढ़ रहा है। हालांकि अभी किसी आबादी वाले क्षेत्र में जलभराव की स्थिति नहीं बनी है। प्रशासन का कहना है कि बाढ़ की संभावित स्थिति को देखते हुए जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से गंगा के किनारे न जाएं, बच्चों को अकेले घाटों पर न भेजें और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल प्रशासन को दें।
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गंगा का जलस्तर घाटों तक पहुंचा, 13 सेमी घटा:उन्नाव में तटीय इलाकों में अलर्ट, अभी चेतावनी बिंदु से नीचे