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अमेठी के 72 परिषदीय विद्यालयों में ‘लर्निंग बाय डूइंग’ लैब शुरू की गई हैं। इन लैब के माध्यम से बच्चों को किताबों के साथ साथ प्रयोगों द्वारा गणित, विज्ञान और व्यावसायिक शिक्षा का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य छात्रों में तार्किक और तकनीकी सोच विकसित करना है। इन लैब में बच्चों को प्रयोगों के जरिए सिखाया जा रहा है। केंद्रीय भंडारण निगम ने लैब के लिए 155 प्रकार की शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई है। लैब में इंजीनियरिंग, फूड प्रोसेसिंग, कृषि और विद्युतीकरण से संबंधित गतिविधियां शामिल हैं। राज्य स्तर पर प्रशिक्षित शिक्षक ‘आओ करके सीखें’ पद्धति का उपयोग कर रहे हैं। मापन, मिश्रण, मॉडल निर्माण और वैज्ञानिक प्रयोगों के माध्यम से छात्रों में रचनात्मक सोच और समस्या सुलझाने की क्षमता विकसित की जा रही है। प्रत्येक विद्यालय को स्थानीय और कच्ची सामग्री खरीदने के लिए स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के माध्यम से लगभग 60 हजार रुपये दिए गए हैं।
यह परियोजना दो चरणों में लागू की गई है। पहले चरण में 27 विद्यालयों में लैब शुरू हुईं, जबकि दूसरे चरण में 45 विद्यालयों में इनका संचालन हो रहा है। इन विद्यालयों में 13 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, 5 पीएम श्री विद्यालय और अन्य उच्च प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालय शामिल हैं। उन्हीं स्कूलों का चयन किया गया है जहां गणित-विज्ञान के शिक्षक, विद्युतीकरण और चारदीवारी जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। गतिविधियों की तस्वीरें नियमित रूप से प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड की जाती हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) संजय तिवारी ने बताया कि इन लैब के कारण बच्चे अब विषयों को व्यावहारिक रूप से बेहतर ढंग से समझ पा रहे हैं। इससे उनकी सीखने में रुचि बढ़ी है और शिक्षा का स्तर भी सुधर रहा है।
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किताब के साथ, नए प्रयोग भी सीख रहे बच्चे:अमेठी के 72 परिषदीय स्कूलों में 'लर्निंग बाय डूइंग' लैब