![]()
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की उपलब्धता को लेकर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। न्यायालय ने कहा कि उसके स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सरकार यह बताने में विफल रही है कि प्रदेश के अस्पतालों में वेंटिलेटर की वास्तविक आवश्यकता कितनी है और कितने मरीजों को समय पर यह सुविधा नहीं मिल पाती। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने सरकार के जवाब को अपर्याप्त और टालमटोल वाला करार दिया। इसके बाद, अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को व्यक्तिगत रूप से 6 अगस्त को न्यायालय में उपस्थित होकर सभी सवालों का तथ्यात्मक जवाब देने का निर्देश दिया गया है। न्यायालय एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था। न्यायालय ने बताया कि 22 अप्रैल के आदेश में सरकार से वेंटिलेटर की आवश्यकता, उपलब्धता और समय पर सुविधा न मिल पाने वाले मरीजों के संबंध में स्पष्ट आंकड़े मांगे गए थे। लगभग तीन महीने बीत जाने के बाद भी सरकार ने कोई ठोस जानकारी नहीं दी, बल्कि शपथपत्र में केवल यह बताया कि आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने स्वास्थ्य सेवाओं के बजटीय आवंटन और हाल के वर्षों में स्थापित मेडिकल कॉलेजों की स्थिति पर भी सरकार से जवाब मांगा। न्यायालय ने जानना चाहा कि ये मेडिकल कॉलेज स्थानीय स्वास्थ्य जरूरतों को किस हद तक पूरा कर रहे हैं। न्यायालय ने संजय गांधी पीजीआई सहित अन्य प्रमुख सरकारी अस्पतालों को पिछले दो वर्षों के आंकड़ों के आधार पर वेंटिलेटर की मांग और उपलब्धता का विश्लेषण करने का निर्देश दिया है। इन अस्पतालों को यह भी स्पष्ट करना होगा कि मरीजों की वास्तविक आवश्यकता पूरी करने के लिए कितने अतिरिक्त वेंटिलेटर की जरूरत है।
Source link
वेंटिलेटर पर लखनऊ हाईकोर्ट सख्त:जरूरत और उपलब्धता पर सरकार से पूछा सवाल, ACS तलब