पुराने समाजवादी उपेक्षित, शिवपाल का नेतृत्व दिलाएगा बड़ी जीत:मुलायम के करीबी राही बोले- चाचा को मिले संगठन की जिम्मेदारी तो जीतेंगे 390 सीटें


मैनपुरी की किशनी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम हवेलिया में 4 जुलाई को आयोजित एक कार्यक्रम का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में पूर्व केंद्रीय मंत्री बलराम सिंह के ओएसडी व सपा विधायक उर्मिला यादव के प्रतिनिधि रह चुके संवेदना फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर धर्मवीर सिंह राही खुले मंच से समाजवादी पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं। उनके बयान जिले के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। कार्यक्रम के दौरान राही ने कहा कि समाजवादी पार्टी की दिशा बदल रही है, जिसका असर संगठन पर साफ दिखाई दे रहा है। उनका कहना था कि वर्षों तक पार्टी के लिए संघर्ष करने वाले पुराने समाजवादी नेता और कार्यकर्ता आज उपेक्षा का शिकार हैं। उन्हें वह सम्मान नहीं मिल रहा, जो नेताजी मुलायम सिंह यादव के समय संगठन की पहचान हुआ करता था। उन्होंने कहा कि आज भी कार्यकर्ताओं का भरोसा शिवपाल सिंह यादव के नेतृत्व पर कायम है। उन्होंने कहा कि यदि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण और संगठन संचालन की जिम्मेदारी शिवपाल सिंह यादव के अनुभव के आधार पर तय की जाए तो समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में 390 सीटें जीत सकती है और अखिलेश मुख्यमंत्री बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी के भीतर मौजूद गलत प्रवृत्ति के लोगों पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया तो नुकसान विपक्ष नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर बैठे लोग ही करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार भाजपा की मौजूदगी से ज्यादा नुकसान संगठन के भीतर की कमजोरियां पहुंचाती हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में किसान, मजदूर, नौजवान, कर्मचारी, अधिकारी और आम मरीज तक परेशान हैं। ऐसे माहौल में समाजवादी पार्टी के पास जनता के बीच मजबूत विकल्प बनने का अवसर है, लेकिन इसके लिए नेताजी मुलायम सिंह यादव की कार्यशैली और सर्वसमाज को साथ लेकर चलने वाली राजनीति को फिर से अपनाना होगा। उनका कहना था कि पहले पार्टी में हर वर्ग के लोगों को सम्मान मिलता था, जबकि अब पुराने समाजवादियों को मंच तक पर उपेक्षित किया जा रहा है। बोले- मैं 1990 से सपा से जुड़ा हूं दैनिक भास्कर से बातचीत में इंजीनियर धर्मवीर सिंह राही ने कहा कि वह वर्ष 1990 से समाजवादी विचारधारा से जुड़े हैं और 2012 के बाद पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में लगातार बदलाव देख रहे हैं। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा कि संगठन कुछ लोगों के इर्द-गिर्द सिमटता जा रहा है। उनका मानना है कि यदि पार्टी को मजबूत करना है तो सर्वसमाज की भावनाओं का सम्मान करना होगा और पुराने कार्यकर्ताओं को फिर से संगठन में उचित स्थान देना होगा। 390 सीटों के अपने बयान पर उन्होंने कहा कि उनका आशय केवल संख्या बताना नहीं था, बल्कि यह संदेश देना था कि यदि अखिलेश यादव, नेताजी मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक मॉडल और शिवपाल सिंह यादव के संगठनात्मक अनुभव का समन्वय करें तो समाजवादी पार्टी ऐतिहासिक प्रदर्शन कर सकती है। उन्होंने कहा कि शिवपाल सिंह यादव ने 1980 से पहले नेताजी के साथ राजनीति शुरू की थी। प्रदेश का शायद ही कोई जिला ऐसा होगा, जहां उनकी पहचान न हो। ऐसे अनुभव का लाभ संगठन और टिकट वितरण में मिलना चाहिए। इंजीनियर धर्मवीर सिंह राही का राजनीतिक सफर भी लंबा रहा है। वर्ष 1996 में घिरोर विधानसभा से सपा विधायक उर्मिला यादव के प्रतिनिधि रहते हुए उन्होंने संगठन की जिम्मेदारी संभाली। 26 वर्ष की उम्र में उन्होंने मैनपुरी लोकसभा सीट से मुलायम सिंह यादव के खिलाफ चुनाव भी लड़ा था। उस चुनाव में उनका चुनाव चिन्ह लालटेन था। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री बलराम सिंह यादव के प्रतिनिधि रहे हैं और नेताजी मुलायम सिंह यादव के करीबी नेताओं में उनकी पहचान रही है। हाल ही में करहल विधानसभा चुनाव में उन्होंने सपा प्रत्याशी तेज प्रताप यादव का भी समर्थन किया था। वर्तमान में वह संवेदना फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनके वायरल वीडियो के बाद जिले की राजनीति में संगठन और नेतृत्व को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

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