मिर्जापुर में अव्यवस्था पर भड़के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद:कार्यक्रम के प्रवेश द्वार पर खड़ी बाइक देख अधिकारियों को लगाई फटकार, बोले- जनता असली भगवान


मिर्जापुर में मत्स्य विभाग की निषादराज बोट सब्सिडी योजना से जुड़े सरकारी कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री संजय निषाद व्यवस्थाओं को लेकर नाराज हो गए। सभागार के मुख्य प्रवेश द्वार पर खड़ी बाइक देखकर उन्होंने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और भविष्य में ऐसी लापरवाही न होने के निर्देश दिए। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने बुधवार को सिटी ब्लॉक परिसर में आयोजित मत्स्य विभाग एवं निषादराज बोट सब्सिडी योजना से जुड़े सरकारी कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई। कार्यक्रम स्थल के मुख्य प्रवेश द्वार पर बाइक खड़ी मिलने पर उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को फटकार लगाई। मंत्री संजय निषाद ने अधिकारियों से पूछा कि सरकारी कार्यक्रम के दौरान सभागार के प्रवेश द्वार के सामने वाहन कैसे खड़ा रहने दिया गया। उन्होंने इसे कार्यक्रम की गरिमा और सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से गंभीर लापरवाही बताते हुए भविष्य में ऐसी स्थिति न बनने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी सरकारी कार्यक्रमों में पार्किंग की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और सभागार तथा कार्यक्रम स्थल के प्रवेश मार्ग पूरी तरह अवरोधमुक्त रखे जाएं, ताकि अतिथियों, जनप्रतिनिधियों और आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। ‘जनता ही असली भगवान है’ मंत्री संजय निषाद ने कहा कि जनता ही असली भगवान है और वे जनता की सेवा के उद्देश्य से राजनीति में आए हैं। उन्होंने लोगों से आत्मनिर्भर बनने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने का काम कर रही है। उन्होंने पिछली सरकारों पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार 61,500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। उन्होंने बताया कि निषादराज बोट सब्सिडी योजना के तहत महिलाओं को 60 प्रतिशत और पुरुषों को 40 प्रतिशत सब्सिडी देने के साथ शिक्षा के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। मंत्री की नाराजगी के बाद अधिकारियों ने तत्काल प्रवेश द्वार से बाइक हटवाई और कार्यक्रम स्थल की व्यवस्थाओं का दोबारा निरीक्षण किया। इसके बाद कार्यक्रम निर्धारित समयानुसार संपन्न हुआ।

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