दहेज प्रताड़ना, आत्महत्या के लिए उकसाने में पति दोषी:कोर्ट ने 7 साल जेल की सजा सुनाई, 5 हजार जुर्माना भी लगाया


दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने के 15 साल पुराने मामले में अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम दीपनारायण तिवारी ने बुधवार को एक अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने आरोपी पति को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि यदि दोषी पति अर्थदंड का भुगतान नहीं करता है, तो उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। यह घटना कोपागंज थाना क्षेत्र में 15 वर्ष पूर्व हुई थी। मामले में मृत विवाहिता के परिजनों की तहरीर पर पति, सास और ससुर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। हालांकि, कोर्ट ने आरोपी सास और ससुर को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। मृतक विवाहिता पूनम के पिता कांता राम ने कोपागंज थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। कांता राम मुहम्मदाबाद गोहना थाना क्षेत्र के डंगौली निवासी हैं। उन्होंने बताया था कि उनकी बेटी पूनम की शादी वर्ष 2007 में कोपागंज थाना क्षेत्र के पिपरौता निवासी चंदन राम से हुई थी। शिकायत के अनुसार, शादी के कुछ समय बाद से ही ससुराल पक्ष द्वारा दहेज की मांग को लेकर पूनम का उत्पीड़न किया जाने लगा। इस प्रताड़ना से तंग आकर पूनम ने 17 मार्च 2011 को आत्महत्या कर ली थी। विवाहिता के पिता की तहरीर पर पति चंदन राम, सास मुखिया देवी और ससुर सुभाष राम के खिलाफ दहेज प्रताड़ना (धारा 498ए), आत्महत्या के लिए उकसाने (धारा 306 भादवि) और दहेज प्रतिषेध अधिनियम (धारा 3/4 डीपी एक्ट) सहित अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी (सीएडब्ल्यू) राजेश कुमार पाण्डेय ने 10 गवाहों को प्रस्तुत कर आरोपों को साबित किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, न्यायाधीश दीपनारायण तिवारी ने पति चंदन राम को दोषी ठहराया, जबकि सास और ससुर को बरी कर दिया।

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