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लखनऊ के इंदिरा नगर स्थित जैन मंदिर में सोमवार को आर्यिका 105 वियोजना का 16वां दीक्षा दिवस ‘गुरु उपकार दिवस’ के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा, जहां गुरु भक्ति और संयम का संदेश दिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गणाचार्य विराग सागर महामुनिराज के चरणों के प्रक्षालन से हुई। संघस्थ सभी आर्यिका माताओं ने विधि-विधान के साथ पूजन किया। इसके बाद आर्यिका 105 वियोजना का पाद प्रक्षालन कर उनका सम्मान किया गया। इस अवसर पर उन्हें ज्ञान का प्रतीक शास्त्र भी भेंट किया गया। संयम जीवन का वास्तविक सार अपने प्रवचन में आर्यिका वियोजना ने गुरु के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जिसका कोई गुरु नहीं, उसका जीवन वास्तव में शुरू ही नहीं होता। उन्होंने संयम को जीवन का वास्तविक सार बताते हुए कहा कि बिना संयम के मनुष्य का जीवन पशु के समान हो जाता है। आर्यिका वियोजना ने श्रद्धालुओं को जीवन में छोटे-छोटे नियम अपनाने की प्रेरणा दी, जिससे बड़े बदलाव आते हैं। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक नियम अवश्य लेने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि सभी प्राणियों के प्रति बुरा सोचने का त्याग करना आध्यात्मिक उन्नति की पहली सीढ़ी है। 21 जुलाई से लखनऊ में अष्टानिका पर्व मनाया जायेगा जैन समाज के महामंत्री अभिषेक जैन ने बताया कि इस वर्ष चातुर्मास के दौरान पूरे अवध क्षेत्र में धर्म की व्यापक प्रभावना होगी। उन्होंने जानकारी दी कि 21 जुलाई से लखनऊ में अष्टानिका पर्व के अवसर पर आठ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन आचार्य सुबल सागर महाराज के सानिध्य में किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के दिन आचार्य संघ चार माह के प्रवास के लिए लखनऊ पहुंचेगा। इस दौरान शहर में विशेष साधना और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में ऋषभ जैन, अनुरोध जैन, अपर्णा, शिप्रा, सनत, अरविंद, अभय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। गुरु उपकार दिवस पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने गुरु भक्ति, संयम और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
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लखनऊ के इंदिरा नगर जैन मंदिर में गुरु उपकार दिवस:21 जुलाई से लखनऊ में अष्टानिका पर्व मनाया जायेगा