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मऊ: उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद द्वारा प्रस्तावित लगभग 900 बीघा भूमि के अधिग्रहण के विरोध में रविवार शाम 7 बजे डाड़ी, रेवरीडीह, शहरोज, मेघई और मुहम्मदपुर शहरोज गांवों के किसानों ने एक बैठक की। इस बैठक में किसानों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी जमीन ‘कौड़ियों के भाव’ नहीं देंगे और उचित मुआवजा मिलने तक उनका विरोध जारी रहेगा। किसान नेताओं ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि भूमि अधिग्रहण का नोटिस करीब एक वर्ष पहले जारी किया गया था, लेकिन मुआवजे की दर तय करने के लिए आज तक किसानों के साथ कोई बैठक नहीं हुई है। उनका कहना है कि अधिकारियों ने मनमाने तरीके से बेहद कम दरें निर्धारित की हैं, जिसे किसान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। किसान नेता देव प्रकाश राय ने कहा, “जमीन कहीं नहीं जा रही है, हम उस पर खेती कर रहे हैं। यदि सरकार को जमीन चाहिए तो उसका उचित मुआवजा दे। हमारी आंखों के सामने कॉलोनी बनेगी, ऊंचे-ऊंचे बिजली के पोल लगेंगे, लेकिन उसमें हमारा एक कमरा भी नहीं होगा। बाप-दादाओं की जमीन औने-पौने दाम पर चली जाएगी तो दर्द होना स्वाभाविक है।” उन्होंने चार लेन सड़क परियोजना का उदाहरण देते हुए बताया कि लगभग 10 वर्ष पहले इसी क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण के दौरान किसानों को लगभग 44 लाख रुपये प्रति बीघा का मुआवजा मिला था। इसके विपरीत, अब 12 से 18 लाख रुपये प्रति बीघा जैसी दरों की चर्चा हो रही है, जिसे किसान पूरी तरह अस्वीकार्य मानते हैं। किसानों ने 1 जुलाई को नगर विकास मंत्री ए. के. शर्मा से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा था। मंत्री ने प्रमुख सचिव, आवास विकास परिषद और जिलाधिकारी से इस मामले में बातचीत करने का आश्वासन दिया है और मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखने की बात कही है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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किसान बोले, कौड़ियों के भाव जमीन नहीं देंगे:मऊ में आवास विकास परिषद के भूमि अधिग्रहण का विरोध, मुआवजे की मांग