प्रशांत किशोर बांकीपुर से लड़ेंगे विधानसभा चुनाव:नितिन नवीन के गढ़ में बीजेपी को देंगे टक्कर; जानिए BJP से कौन हो सकता है उम्मीदवार


पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर जसुराज पार्टी की ओर से प्रशांत किशोर उम्मीदवार होंगे। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज भारती ने इसकी घोषणा की है। प्रशांत किशोर ने कहा, “चार सालों से जन सुराज ही मेरी जिंदगी है। पार्टी ने मुझे जो जिम्मेदारी दी है उसे पूरा करने का प्रयास करूंगा। बांकीपुर से अगर जीत मिलती है तो उससे पार्टी का मनोबल काफी बढ़ेगा और पार्टी आगे बढ़ेगी।” बता दें नितिन नवीन के राज्यसभा सांसद बनने के बाद से ही पीके के बांकीपुर से चुनाव लड़ने की चर्चा थी। पिछले दिनों खुद पीके ने कहा था- अगर मेरे चुनाव लड़ने से भाजपा बांकीपुर जैसी मजबूत सीट हारती है, तो मैं चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूं। BJP से ये हो सकते हैं उम्मीदवार 1. अजय आलोक नेशनल मीडिया में भाजपा के मजबूत चेहरे के रूप में पहचाने जाने वाले अजय आलोक को भी बांकीपुर में नितिन नवीन के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है। कायस्थ जाति से आने वाले डॉ. आलोक के पिता पद्म श्री गोपाल प्रसाद सिन्हा बड़े डॉक्टर हैं। पटना में इनकी एक अलग छवि है। 2003 में अपना पॉलिटिकल करियर शुरू करने वाले आलोक ने 2005 में कैमूर के चैनपुर विधानसभा सीट से LJP के टिकट पर चुनाव लड़ा था। 2010 के चुनाव में भी इन्होंने इसी सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। वे दोनों चुनाव हार गए। इसके बाद 2012 में जदयू जॉइन किया। पार्टी के प्रवक्ता और महासचिव बने। 2023 में जदयू से इस्तीफा देकर BJP का दामन थामा। फिलहाल BJP के राष्ट्रीय मीडिया का मुखर चेहरा हैं। 2. रणवीर नंदन भाजपा नेता रणवीर नंदन धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष हैं। इनके नाम की भी चर्चा बांकीपुर सीट के लिए है। रणवीर शिक्षित और सौम्य क्षवि के नेता माने जाते हैं। कायस्थ जाति से आते हैं। पटना के ही रहने वाले हैं। प्रो. रणवीर नंदन कभी नीतीश कुमार के भरोसेमंद माने जाते थे। 2014 में नीतीश ने इन्हें पहली बार अपनी पार्टी के कोटे से विधान परिषद भेजा था। 2020 में कार्यकाल पूरा होने के बाद पार्टी की तरफ से इन्हें रिपीट नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने सितंबर 2023 में जेडीयू से इस्तीफा दे दिया था। पूर्व विधायक के बेटे भी टिकट के लिए लगा रहे चक्कर बांकीपुर से अपनी दावेदारी के लिए कई नेताओं के पुत्र के भी नाम आ रहे हैं, जो टिकट के लिए नेतृत्व का चक्कर लगा रहे हैं। इनमें दो नाम सबसे प्रमुख है। कुम्हरार के पूर्व विधायक अरुण सिन्हा के बेटे आशीष सिन्हा टिकट की जुगत में जुटे हुए हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान अरुण सिन्हा को कुम्हरार सीट से बेटकिट कर दिया गया था। तब इस बात का भारी विरोध हुआ था। आशीष सिन्हा पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके पिता भी उनकी पैरवी में लगे हुए हैं। नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से खाली हुई सीट यह उपचुनाव इस सीट से पांच बार के विधायक रहे नितिन नवीन के इस्तीफे की वजह से हो रहा है। नितिन नवीन को भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किए जाने और अप्रैल 2026 में उनके राज्यसभा जाने के कारण यह सीट खाली हुई थी। बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र, जिसे पहले पटना पश्चिम कहा जाता था, में पिछले दो दशकों से नितिन नवीन और उनसे पहले उनके दिवंगत पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा का एकछत्र राज रहा है। प्रशांत किशोर के लिए क्यों अहम है यह चुनाव? पीके ने साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में खुद कोई सीट नहीं लड़ी थी, और उनकी पार्टी जन सुराज मात्र 3.34% वोट शेयर के साथ एक भी सीट जीतने में नाकाम रही थी। प्रशांत किशोर ने खुद माना था कि चुनाव न लड़ना उनकी “रणनीतिक भूल” थी, जिसे वह अब सुधार रहे हैं। जन सुराज ने अब तक ग्रामीण बिहार में पदयात्राओं के जरिए अपनी मजबूत जमीन तैयार की है। पटना के शहरी, शिक्षित और पारंपरिक रूप से भाजपा समर्थक मतदाताओं को अपने पाले में लाना पीके की सांगठनिक क्षमता की सबसे बड़ी परीक्षा होगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा की साख दांव पर प्रशांत किशोर और जन सुराज इस उपचुनाव को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए (NDA) सरकार के कामकाज पर एक जनमत संग्रह के रूप में लड़ रहे हैं। प्रशांत किशोर का कहना है की बांकीपुर चुनाव अगर बीजेपी हारती है तो दिल्ली में अमित शाह और नरेंद्र मोदी तकिया मैसेज जाएगा कि बिहार जनता मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से खुश नहीं है। साल 1995 से इस सीट पर लगातार भाजपा का कब्जा रहा है। यहां का प्रभावशाली व्यापारी वर्ग और कायस्थ मतदाता वर्ग भाजपा की रीढ़ माना जाता है।

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