Lucknow University Reopens Doctorate Admissions for D.Litt, D.Sc, LL.D

लखनऊ विश्वविद्यालय में फिर से D.Litt., D.Sc. और LL.D. में होंगे दाखिले।

उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय ने करीब 18 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद डी.लिट. (D.Litt.), डी.एससी. (D.Sc.) और एल.एल.डी. (LL.D.) जैसी सर्वोच्च शोध उपाधियों में प्रवेश प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की तैयारी पूरी क

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नए अध्यादेश के तहत डी.लिट. की उपाधि कला, शिक्षा, वाणिज्य और ललित कला संकायों में D.Sc. विज्ञान, इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी और फार्मेसी संकायों में और LL.D. विधि संकाय के शोधार्थियों को प्रदान की जाएगी।

प्रवेश के लिए कड़े मानदंड

इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश केवल उन अभ्यर्थियों को मिलेगा जिनके पास संबंधित विषय में पीएचडी, पीएचडी के बाद कम से कम पांच वर्ष का नियमित शिक्षण, शोध या प्रशासनिक अनुभव तथा यूजीसी सूचीबद्ध या प्रतिष्ठित जर्नलों में प्रकाशित उच्च गुणवत्ता के कम से कम 10 शोध पत्र होंगे। सभी शोध पत्रों में अभ्यर्थी का प्रथम या करेस्पॉन्डिंग लेखक होना अनिवार्य होगा।

पहली बार ‘सेल्फ सुपरविजन’ का प्रावधान

नए अध्यादेश की सबसे बड़ी विशेषता ‘सेल्फ सुपरविजन’ व्यवस्था है। इसके तहत अनुभवी वैज्ञानिक और प्रोफेसर बिना किसी गाइड के स्वतंत्र रूप से शोध कर सकेंगे। इसके लिए पीएचडी के बाद कम से कम 10 वर्ष का अनुभव और 15 उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्र प्रकाशित होना आवश्यक होगा। वहीं, गाइड के साथ शोध करने वाले अभ्यर्थियों के लिए केवल ऐसे प्रोफेसर ही एडवाइजर बन सकेंगे जिन्होंने कम से कम पांच पीएचडी शोधार्थियों का सफल मार्गदर्शन किया हो।

दो से चार वर्ष में पूरा करना होगा शोध

आवेदन के साथ 1500 से 3000 शब्दों का सिनॉप्सिस, शोध कार्य का संक्षिप्त विवरण और एनओसी जमा करनी होगी। चयन के बाद शोध कार्य न्यूनतम दो और अधिकतम चार वर्ष में पूरा करना होगा। थीसिस जमा करने से पहले प्री-सबमिशन सेमिनार अनिवार्य होगा। शोध प्रबंध का प्लेजरिज्म और AI जांच के बाद तीन स्वतंत्र परीक्षकों से मूल्यांकन कराया जाएगा। सभी की सकारात्मक रिपोर्ट मिलने पर ओपन वाइवा के बाद उपाधि प्रदान की जाएगी।

कुलपति बोले – क्वालिटी रिसर्च पर फोकस

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.जेपी सैनी ने कहा कि लगभग 18 वर्षों बाद इन सर्वोच्च शोध उपाधियों की प्रवेश प्रक्रिया बहाल होना विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उनका कहना है कि उद्देश्य केवल डिग्रियां देना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप मौलिक, नवाचार आधारित और वैश्विक स्तर के शोध को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि पूरी प्रवेश और मूल्यांकन प्रक्रिया पारदर्शी और गुणवत्ता आधारित होगी।

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