15 दिवसीय नाट्य कार्यशाला का समापन:मनिकर्णिका के निर्भीक व्यक्तित्व से लेकर झांसी की महारानी बनने तक का मंचन


उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ और संस्था ‘विजय बेला एक कदम खुशियों की ओर’ के सहयोग से आयोजित 15 दिवसीय नाट्य कार्यशाला का समापन हो गया है। इस कार्यशाला का समापन लखनऊ पब्लिक स्कूल, बाराबंकी शाखा के प्रेक्षागृह में ऐतिहासिक नाटक ‘वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई’ के प्रभावशाली मंचन के साथ हुआ। नाटक में बालिका मनिकर्णिका के निर्भीक व्यक्तित्व से लेकर झांसी की महारानी बनने और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उनके संघर्ष को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। रानी लक्ष्मीबाई का प्रसिद्ध उद्घोष ‘मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी’ मंच से गूंजते ही पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। क्रांतिकारियों के संघर्ष को भी प्रभावी ढंग से दिखाया युद्ध के दृश्यों, ओजपूर्ण संवादों और कलाकारों के जीवंत अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नाटक में तात्या टोपे, नाना साहेब और अन्य क्रांतिकारियों के संघर्ष को भी प्रभावी ढंग से दर्शाया गया। इस प्रस्तुति ने राष्ट्रभक्ति, आत्मसम्मान और नारी सशक्तिकरण का सशक्त संदेश दिया। इन कलाकारों ने शानदार अभिनय किया अंतिम दृश्य में रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान का चित्रण दर्शकों को भावुक कर गया। कलाकारों के उत्कृष्ट अभिनय से प्रभावित दर्शकों ने देर तक तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया। नाटक में मलक बुशरा, प्राख्या श्रीवास्तव, श्रेया श्रीवास्तव, अंशिका रस्तोगी, शुभांगी वर्मा, स्मिता तिवारी, प्राची रस्तोगी, राशि रस्तोगी, श्रद्धा कुमारी, देवेंद्र कुमार सहित सभी कलाकारों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से इस कार्यक्रम को यादगार बनाया।

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