लखनऊ में अवैध कब्जे-प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर चिंतन:विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा मुद्दा बनाने की मांग


राजधानी लखनऊ में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले जल, जंगल और जमीन पर बढ़ते अवैध कब्जों तथा प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। रविवार को यूपी प्रेस क्लब में आयोजित जयहिंद संवाद के पांचवें चरण के पाक्षिक विमर्श में वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को लोकतंत्र और जनजीवन से जुड़ा अहम सवाल बताया। कार्यक्रम में जस्टिस पार्टी के अध्यक्ष राशिद जमील खान ने कहा कि देश के प्राकृतिक संसाधनों को बड़े उद्योगपतियों के हाथों सौंपने की नीतियां आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन का आधार हैं। प्रभावी कार्रवाई नहीं होना गंभीर चिंता का विषय नगर निगम ठेकेदार संघ के अध्यक्ष फरहत कासिम ने उत्तर प्रदेश में बढ़ती अवैध वन कटाई पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि मलिहाबाद और काकोरी जैसे आम उत्पादक क्षेत्रों में भूमाफियाओं द्वारा लगातार पेड़ों की कटाई की जा रही है। कई बार मीडिया में मामला उजागर होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है। ट्रेड यूनियन नेता पीसी कुरील ने कहा कि संविधान की मूल भावना समानता और संसाधनों पर सबकी भागीदारी की रही है, लेकिन समय के साथ लोकतांत्रिक संस्थाओं पर प्रभाव बढ़ने से प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जे की प्रवृत्ति तेज हुई है। उन्होंने नागरिकों से जनभागीदारी आंदोलन से जुड़ने का आह्वान किया। बढ़ते भ्रष्टाचार को चुनावी मुद्दा बनाने पर चर्चा पीपुल्स जस्टिस पार्टी के मोहम्मद मोबीन ने लखनऊ में तेजी से बढ़ते निर्माण कार्यों और भूजल दोहन पर सवाल उठाते हुए चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो गंभीर जल संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने गोमती नदी के संरक्षण को भी प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की मांग की। वहीं, लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र अन्वेष शुक्ला ने पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और संभल में वन एवं भूमाफियाओं की गतिविधियों पर तथ्य प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के संचालक विमल प्रकाश ने बताया कि जयहिंद संवाद का अगला चरण 15 जुलाई को होगा, जिसमें मूलभूत सुविधाओं में बढ़ते भ्रष्टाचार को चुनावी मुद्दा बनाने पर चर्चा की जाएगी।

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