पुरानी पेंशन बहाली, निजीकरण पर रोक की मांग:अटेवा की जनजागरण यात्रा लखनऊ पहुंची, टीईटी अनिवार्यता खत्म करने की भी मांग


अटेवा (ऑल टीचर्स एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन) की जनजागरण यात्रा का दूसरा चरण रविवार को लखनऊ पहुंचा। यह यात्रा पुरानी पेंशन बहाली, सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर रोक और टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर निकाली जा रही है। यात्रा रायबरेली, प्रतापगढ़ और बाराबंकी से होते हुए राजधानी पहुंची। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु का स्वागत किया गया। यात्रा के दौरान आरपीटी कॉलेज, गोसाईगंज, गंगागंज, इलियासपुर, नवीनगर, नगराम, खुजौली और गणेशगंज चौराहा सहित कई स्थानों पर स्वागत कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में कर्मचारियों, शिक्षकों, किसानों और युवाओं ने भाग लिया। इस दौरान पुरानी पेंशन बहाली और निजीकरण के खिलाफ सरकार की नीतियों पर चर्चा हुई। निजीकरण कर्मचारियों और युवाओं के भविष्य के लिए एक गंभीर चुनौती अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कहा कि सरकारी संस्थानों का निजीकरण कर्मचारियों और युवाओं के भविष्य के लिए एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल नहीं होती, निजीकरण पर रोक नहीं लगती और टीईटी की अनिवार्यता समाप्त नहीं होती, तब तक अटेवा का संघर्ष जारी रहेगा। प्रदेश विधिक सलाहकार नरेंद्र कुमार ने पुरानी पेंशन को शिक्षकों और कर्मचारियों का संवैधानिक एवं नैतिक अधिकार बताया। उन्होंने कहा कि संगठन इस मांग को लेकर हर स्तर पर संघर्ष करेगा और आंदोलन को और मजबूत बनाया जाएगा। ये मौजूद रहे इस अवसर पर प्रदेश महामंत्री नीरज पति त्रिपाठी, कमल उसरी, ओम प्रकाश, विक्रमादित्य मौर्य, सतेंद्र राय, आशीष वर्मा, रजत प्रकाश, आर्यन वेद, प्रेमचंद, पार्षद चंद्रभान, अधिवक्ता शुभम और रेलवे मंडल मंत्री राकेश चंद्र वर्मा सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, कर्मचारी, अधिवक्ता, बुद्धिजीवी, बुजुर्ग और बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे।

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