2016-2026 तक तैनात 100 से ज्यादा अफसरों की जांच:लखनऊ अग्निकांड मामले में SIT खंगालेगी PCS अफसरों की संपत्ति, LDA से मांगी रिपोर्ट


लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड विशेष जांच दल (एसआईटी) जांच कर रही है। एसआईटी लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) में 2016 से 2026 तक तैनात रहे पीसीएस अधिकारियों की संपत्तियों की पड़ताल करेगी। सूत्रों के मुताबिक, जिन अधिकारियों की भूमिका अवैध निर्माण, मानचित्र स्वीकृति, संपत्ति आवंटन और प्रवर्तन कार्रवाई से जुड़ी रही है, उनसे जल्द पूछताछ की जाएगी। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को बयान दर्ज कराने के लिए तलब किए जाने की तैयारी है। एसआईटी ने जांच के दौरान अग्निकांड वाली बिल्डिंग से जुड़ी मूल संपत्ति फाइल, मानचित्र फाइल और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेख एलडीए से अपने कब्जे में ले लिए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर यह जांच की जाएगी कि निर्माण को किस स्तर पर अनुमति मिली? किन अधिकारियों ने फाइलों पर अनुमोदन दिया और अवैध निर्माण के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई? मुहर्रम की छुट्टी में भी हुई पूछताछ, वीसी और अपर सचिव हुए पेश मुहर्रम के अवकाश के दिन भी जांच की रफ्तार नहीं थमी। एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार और अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा एसआईटी के सामने पेश हुए। बताया जा रहा है कि एसआईटी ने अवैध निर्माण में इंजीनियरों की मिलीभगत और प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया। अधिकारियों से पूछा गया कि निर्माण के दौरान किस स्तर पर निगरानी में चूक हुई और भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? 2016 से 2026 तक का पूरा रिकॉर्ड खंगाल रही एसआईटी एसआईटी ने 2016 से 2026 तक अलीगंज क्षेत्र में तैनात रहे अधिकारियों और इंजीनियरों का पूरा ब्यौरा मांगा है। एलडीए ने ऐसे 100 से अधिक अधिकारियों, इंजीनियरों और संबंधित कर्मचारियों की सूची तैयार करनी शुरू कर दी है, जो किसी न किसी रूप में संपत्ति, मानचित्र, प्रवर्तन या विहित प्राधिकारी के कार्य से जुड़े रहे। सूत्रों का कहना है कि जांच में केवल वर्तमान नहीं, बल्कि पूर्व में तैनात अधिकारियों की भूमिका भी खंगाली जाएगी। यदि किसी स्तर पर अवैध निर्माण को संरक्षण देने या कार्रवाई रोकने के साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। पीसीएस अधिकारियों की संपत्ति का भी होगा मिलान जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एसआईटी अब उन पीसीएस अधिकारियों की चल-अचल संपत्तियों का भी ब्योरा जुटाएगी, जिनकी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं पद पर रहते हुए आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने या अवैध निर्माण से जुड़े आर्थिक लाभ के संकेत तो नहीं हैं। जरूरत पड़ने पर अन्य एजेंसियों से भी जानकारी ली जा सकती है। 19 इंजीनियर और 5 पीसीएस अफसर पहले ही जांच के घेरे में एलडीए की आंतरिक जांच समिति अब तक 19 इंजीनियरों और पांच पीसीएस अधिकारियों के नाम एसआईटी को सौंप चुकी है। 2 अन्य पीसीएस अधिकारियों के कार्यकाल और भूमिका की भी जांच जारी है। अवैध निर्माण से जुड़ी पूर्व शिकायतों के आधार पर 8 इंजीनियरों की अलग सूची तैयार की गई है। इनमें सहायक अभियंता संजय शुक्ल और रवींद्र श्रीवास्तव सहित कई अधिकारियों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। इंजीनियरों पर भी कसने लगा शिकंजा एलडीए ने हाल ही में 25 सुपरवाइजरों के कार्य क्षेत्र बदल दिए हैं। अब कई सहायक अभियंताओं और अवर अभियंताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी है। एसआईटी की सख्ती के बाद एलडीए स्तर पर इंजीनियरों के स्थानांतरण और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया है कि पुराने लखनऊ के जोन-7 में पिछले चार महीने से नियमित जोनल अधिकारी की तैनाती नहीं थी। जोन-6 के अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के कारण निगरानी प्रभावित रही। माना जा रहा है कि इसी दौरान क्षेत्र में अवैध निर्माण तेजी से बढ़े। एसआईटी इस प्रशासनिक व्यवस्था की भी समीक्षा कर रही है कि नियमित अधिकारी न होने से कार्रवाई क्यों प्रभावित हुई। अधिकारियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी जांच का हिस्सा जोन-7 में सहायक अभियंता और अवर अभियंताओं के बीच अवैध निर्माण को लेकर एक-दूसरे पर लगाए गए आरोप भी जांच के दायरे में हैं। दोनों पक्षों की शिकायतों को एसआईटी रिकॉर्ड का हिस्सा बना रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अवैध निर्माण के लिए वास्तविक जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है। जल्द शासन को भेजी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट एसआईटी को एलडीए की ओर से जल्द विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जाएगी, जिसमें 100 से अधिक अधिकारियों और इंजीनियरों का विवरण, उनके कार्यकाल, जिम्मेदारियां और संबंधित फाइलों का रिकॉर्ड शामिल होगा। सूत्रों का कहना है कि जांच के अगले चरण में कई अधिकारियों के बयान दर्ज होंगे और दस्तावेजों के मिलान के बाद जिम्मेदारी तय करते हुए कठोर कार्रवाई की संस्तुति की जा सकती है। 22 जून को लगी थी आग अलीगंज स्थित एक इमारत में 22 जून को आग लग गई थी। यहां बेसमेंट, ग्राउंड और पहले फ्लोर पर पेट शॉप और क्लीनिक थी। दूसरे फ्लोर पर लर्निंग स्पेस नाम की लाइब्रेरी (कोचिंग) और हेड हॉपर स्टूडियो था। इसमें 3D आर्ट प्रोडक्शन और गेम एसेट आउटसोर्सिंग का काम होता था। हॉपर स्टूडियो में काम करने वाले 15 लोगों की मौत हो गई थी।

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