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सुल्तानपुर में शुक्रवार को दसवीं मोहर्रम का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस कर्बला के 72 शहीदों की शहादत की याद में आयोजित किया गया। शहर के खैराबाद मोहल्ले में स्थित इमामबाड़ा अहमद हुसैन मरहूम से जुलूस शुरू हुआ, जहां मौलाना ने मजलिस को संबोधित किया। अपने संबोधन में मौलाना ने कर्बला की घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि दसवीं मोहर्रम के दिन कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन के बच्चों, नौजवानों और बुजुर्गों को प्यास से तड़पते हुए शहीद किया गया था। मौलाना ने विशेष रूप से इमाम हुसैन के छह महीने के बच्चे अली असगर का उल्लेख किया, जिसे पानी मांगने पर यजीद के लश्कर ने तीर मारकर शहीद कर दिया था। मौलाना ने आगे बताया कि इमाम हुसैन ने अपने खेमे के पीछे तलवार से जमीन खोदकर अली असगर को दफन किया। दफनाने के बाद कब्र पर पानी डालने की परंपरा है, लेकिन उस समय इमाम हुसैन के पास पानी नहीं था। उन्होंने कब्र पर अपना चेहरा रखकर देर तक अश्रु बहाए और अपने आंसुओं से कब्र को तर किया। यह जुलूस शिया मस्जिद, जामे इस्लामिया, अन्नू चौराहा, बाधमंडी चौराहा, जमाल गेट, इलाहाबाद रोड और दरियापुर से होते हुए घासीगंज कर्बला पहुंचा। यहां ताजिये सुपुर्द-ए-खाक किए गए। जुलूस के दौरान अंजुमन गुनचए मजलूमिया ने नौहा मातम और जंजीर का मातम किया। इस अवसर पर डॉ. नैयर रजा, अजादार हुसैन, जियाउल हसनैन, शमीम हैदर, नसीम हुसैन, नाहिद अकबर, मो. हैदर, अनवार हैदर सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे।
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सुल्तानपुर में निकला दसवीं मोहर्रम का जुलूस:जंजीर का किया मातम, कर्बला के शहीदों की याद में सुपुर्द-ए-खाक किए गए ताजिये