लखनऊ में मोहर्रम के पांचवे दिन आग पर मातम:25 लोग आग के ऊपर से गुजरे मौलाना बोले-दशकों पुरानी है परंपरा


लखनऊ में मोहर्रम के महीने लगातार मातम मजलिस और जुलूस का दौर जारी है। मोहर्रम के पांचवें दिन होने वाला परंपरागत आग पर मातम इस वर्ष भी हजरतगंज स्थित इमामबाड़ा शाहनजफ में आयोजित हुआ। आग के मातम से पूर्व मौलाना फरीदुल हसन ने मजलिस को खिताब किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मौजूदा समय इमाम हुसैन की जीवनी को पढ़ना उसपर अमल करना जरूरी है। 25 लोग आग से गुजरे कदीमी मासूमिया असगरिया संगठन की तरफ से आयोजित मातम को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। संगठन के अध्यक्ष सुहैल ने बताया कि विगत 45 सालों से इसका आयोजन हो रहा है। मजलिस के बाद हुसैनी दस्ते हाथों में अलम लिए या हुसैन, या हुसैन की सदाएं बुलंद करते हुए दहकते अंगारों पर गुजरने लगे। लगभग 4 घंटे तक कई कुंटल लकड़ियों को जलाकर आग के अंगारे तैयार किए गए थे। जिस पर या हुसैन का नारा लगाते हुए 25 लोगों ने मातम किया। शिया धर्मगुरु मौलाना फरीदुल हसन ने कहा कि कर्बला में हजरत इमाम हुसैन और 72 साथियों पर कई तरह के जुल्म किए गए। उसमें एक यह भी था कि हजरत इमाम हुसैन को शहीद करने के बाद जब जंग खत्म हुई तो उनके खेमे (टेंट) में आग लगा दिया गया था। इमाम के खेमे में लगी थी आग यजीदी फौजियों की तरफ से इमाम हुसैन के परिवार वालों से जिसमें विशेष कर महिलाएं थी उनसे अभद्रता की गई थी, जो इस्लाम और मानवता के इतिहास में सबसे ज्यादा दुखद है। मौलाना ने कहा कि उसी खेमे की आग को याद करते हुए लोग आज भी आग पर मातम करते हैं। इसमें शिया समुदाय के अलावा अन्य लोग भी शामिल हैं। 18 सालों से कर रहे हैं मातम आग का मातम करने वाले नकी ने बताया कि वो विगत 18 वर्षों से लगातार मोहर्रम के पांचवें दिन आग का मातम करते हैं। बताया कि आग का मातम पूरी दुनिया में जहां हजरत इमाम हुसैन के चाहने वाले हैं, वहां किया जाता है। लखनऊ की बात करें तो यहां विगत 45 वर्षों से आग का मातम हो रहा है। जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। आग का मातम करके हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों को याद करते हैं।

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