IIMT Student Death Protest | CM Yogi Justice Demand

IIMT यूनिवर्सिटी की छात्रा अनु गुप्ता की संदिग्ध मौत के एक महीने बाद भी कार्रवाई न होने से नाराज छात्रों और परिजनों ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम अपने खून से पत्र लिखकर न्याय की मांग की। इसके साथ ही जिलाधिकारी और एडीएम को ज्ञापन सौंप

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छात्र नेता विजित तालियान, अनु गुप्ता के पिता, बहन, चाचा, चौधरी मोहित सिंधु और बड़ी संख्या में छात्रों ने आरोप लगाया कि IIMT यूनिवर्सिटी में छात्रों से विभिन्न तरीकों से अवैध शुल्क वसूला जाता है और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी के खराब व्यवहार और अवैध फीस वसूली से परेशान होकर अनु गुप्ता ने अपनी जान दी, लेकिन परिवार द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर को एक महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

IIMT MBA छात्रा को इंसाफ दिलाने के लिए खून से लिखा पत्र

IIMT MBA छात्रा को इंसाफ दिलाने के लिए खून से लिखा पत्र

परिजनों का आरोप है कि उन्होंने यूनिवर्सिटी के एमडी, वीसी और अन्य अधिकारियों के नाम पुलिस को लिखित रूप से दिए थे, लेकिन अब तक किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा पीड़ित परिवार पर ही दबाव बनाने की कोशिश की गई, जिससे छात्रों में असुरक्षा और नाराजगी का माहौल है।

खून से लिखे पत्र में मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि अनु गुप्ता की मौत समेत यूनिवर्सिटी में पहले हुई सभी संदिग्ध मौतों की उच्च स्तरीय न्यायिक या प्रशासनिक जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। छात्रों ने आरोप लगाया कि पूर्व में भी ऐसे मामलों को धन के बल पर दबा दिया गया।

छात्र बोले 15 दिन के अंदर इंसाफ नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन

छात्र बोले 15 दिन के अंदर इंसाफ नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन

ज्ञापन सौंपने के बाद पुलिस प्रशासन ने छात्रों से मामले में कार्रवाई के लिए अंतिम 15 दिन का समय मांगा। छात्र नेता विजित तालियान ने कहा कि यदि 15 दिन के अंदर अनु गुप्ता को इंसाफ नहीं मिला तो छात्र IIMT यूनिवर्सिटी द्वारा छात्रों पर किए जा रहे अत्याचारों के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि छात्र न्याय मिलने तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

गौरतलब है कि 21 मई को यूनिवर्सिटी हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरने के बाद अनु गुप्ता की मौत हो गई थी। घटना के बाद छात्रों ने भी यूनिवर्सिटी प्रशासन पर छात्रों के साथ खराब व्यवहार करने और मामले को दबाने की कोशिश करने के आरोप लगाए थे।

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