मथुरा जिला अस्पताल में व्यवस्थाओं पर उठे सवाल:मरीजों को झेलनी पड़ रही परेशानी,बढ़ती संख्या बन रही कारण


मथुरा के जिला अस्पताल में इन दिनों मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के बीच स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पटरी से उतरती नजर आ रही हैं। अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं, जिसके कारण ओपीडी से लेकर दवा वितरण काउंटरों और विभिन्न विभागों में भारी भीड़ देखने को मिल रही है। अव्यवस्थाओं के चलते अब स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठने लगे हैं। डॉक्टरों के चैंबर के बाहर लग रही लाइन जिला अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों के कक्षों के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें लग जाती हैं, जिसके कारण उन्हें इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। अस्पताल परिसर में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को उठानी पड़ रही है, जो तपती गर्मी में भी फर्श पर बैठने या खड़े रहने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य कर्मी झेल रहे मानसिक दबाव अस्पताल आने वाले लोगों का आरोप है कि मरीजों की इस संख्या के मुकाबले अस्पताल में संसाधन बेहद कम पड़ते दिखाई दे रहे हैं। भीड़ अधिक होने के कारण डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर भी काम का अतिरिक्त मानसिक और शारीरिक दबाव बना रहता है, जिसके चलते वे चाहकर भी प्रत्येक मरीज को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। भीषण गर्मी में नहीं चल रहे AC इस अव्यवस्था और भारी दबाव को लेकर जब जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रवि माहेश्वरी से बात की गई, तो उन्होंने भी अपनी विवशता जाहिर की। डॉ. माहेश्वरी ने बताया कि एक तरफ जहां मरीजों और भीड़ का दबाव अत्यधिक बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ उनके खुद के रूम (चैंबर) का एसी तक खराब पड़ा है। ऐसी स्थिति में उमस और भीषण गर्मी के बीच डॉक्टरों के लिए भी घंटों बैठकर मरीजों को परामर्श देना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। मरीजों को उपलब्ध हों स्वास्थ्य सुविधा स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को मरीजों की बढ़ती संख्या और मौसम के मिजाज को देखते हुए तत्काल अतिरिक्त सुविधाएं और पुख्ता व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी चाहिए। लोगों का मानना है कि अस्पताल में प्रतीक्षालय (वेटिंग एरिया), बैठने के पर्याप्त बेंच, शुद्ध पेयजल, साफ-सफाई और मरीजों के मार्गदर्शन के लिए सहायता काउंटरों पर कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की नितांत आवश्यकता है। क्षेत्र के संभ्रांत नागरिकों ने जिला प्रशासन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि जिला अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं का संज्ञान लेकर तत्काल सुधार कराया जाए, ताकि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बेहतर व सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

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