राममंदिर जन्मभूमि ट्रस्ट के बीज में ही गड़बड़ी:मेरठ पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले मंदिर ट्रस्ट के खजाने में मांस बिक्री, अन्याय का पैसा


राममंदिर ट्रस्ट में हुए दान, चंदे के घोटाले पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मेरठ में कहा कि इस ट्रस्ट के बीज में ही गड़बड़ी है, उसमें सब कुशल कैसे होगा। कहा कि चंगूमंगू की जो एसआईटी इस घोटाले की जांच कर रही है, वो क्या जांच करेगी ये सबको पता होगा। ट्रस्ट प्रमुख कहते हैं कि ये हमारे रोजमर्रा का काम है, उल्लेखनीय नहीं है, यानि भगवान के दान को यहां रोज इसी तरह चोरी किया जा रहा है। ये चोरी इस सरकार और ट्रस्ट के लिए कोई मायने नहीं रखती। मतलब मंदिरों में रोजाना चोरियां हो रही हैं।
अगर दान घोटाले की वाकई जांच करानी है तो शंकराचार्यों, अयोध्या के संतों को मिलाकर एसआईटी बनाई जाए, जो इस घोटाले की जांच करे। मांस बिक्री, अन्याय का पैसा ट्रस्ट में लगा
गुरुवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मेरठ पहुंचे इस दौरान उन्होंने रामजन्मभूमि ट्रस्ट को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की स्थापना ही गलत तरह से हुई है। आगे कहा कि जब रामजन्मभूमि के लिए ट्रस्ट बनाया जा रहा था रामजन्मभूमि शुद्ध रूप से धार्मिक मामला था। लेकिन इसमें सरकार कूद पड़ी। उसने अपने सरकारी खजाने से उस खजाने से जिसमें गाय की मांस बिक्री का पैसा रखा जाता है। टैक्स का पैसा रखा जाता है, अन्याय का पैसा भी रखा जाता है। उसमें से निकालकर एक रुपया दिया तब यह ट्रस्ट स्थापित हुआ। तो इस ट्रस्ट के अमूल यानि बीज में ही गड़बड़ी है। धर्माचार्यों को नहीं अपने पालतू विश्वस्तों को ट्रस्ट में बैठाया
जब वहां बड़े-बड़े धर्माचार्य वहां मौजूद थे तो धर्माचार्यों के ट्रस्ट को क्यों ठुकराया गया। जिन पक्षकारों ने न्यायालय में पक्षकार बनकर के हिंदूओं की ओर से खड़े होकर मुकदमा लड़ा था तो उनको क्यों साइडलाइन किया गया। क्यों अपने भरोसेमंद लोगों को ट्रस्ट में बैठाया गया। अपने पालतू विश्चस्त लोगों को ट्रस्ट में बैठाने का मतलब ही था कि आगे चलकर हमारी नियत थी कि हमको चोरी करना है। ऐसे खास लोगों को बैठा दो कि बात बाहर न जाए, तो जिस काम के लिए ट्रस्ट बना था वो काम हो रहा है। का ट्रस्ट की शिकायत दर्ज नहीं हुई तो जांच कैसी
आगे कहा कि ट्रस्ट ने तहरीर नहीं दी फिर भी जांच शुरू हो गई, क्या बिना मुकदमे के जांच होती है?’ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने राम मंदिर मामले में चल रही पुलिसिया कार्रवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने अचरज जताते हुए कहा कि जब ट्रस्ट की तरफ से कोई आधिकारिक शिकायत ही दर्ज नहीं कराई गई, तो फिर जांच किस आधार पर की जा रही है। शंकराचार्य के इस बयान के बाद मंदिर की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर नई बहस छिड़ गई है। चंपतराय भाजपा के प्रवक्ता हैं
कहा कि भगवान के चढ़ावे की चोरी हो रही है, वो भी उल्लेखनीय नहीं है। जो व्यक्ति ये सब कह रहा है कि ये सब रोज का काम है ये सब उल्लेखनीय नहीं है। तत्काल इस ट्रस्ट को बंद करना चाहिए। या देश के बड़े बड़े धर्माचार्यों, अखाड़े के प्रमुखों, शंकराचार्यों, आचार्यों को या फिर जिन लोगों ने न्यायालय में पक्षकार बनकर मुकदमा लड़ा था, हिंदू समुदाय की ओर से उन समस्त पैरोकारों को मिलाकर इस ट्रस्ट में शामिल किया जाए। उन्हें ये ट्रस्ट सौंपा जाए। जो चंगूमंगू बैठाकर काम हो रहा है उनको हटाया जाना चाहिए। उनके आदमी ने आकर कह दिया कि कुछ उल्लेखनीय नहीं है ये तो हमारे रोज का काम है। चंपतराय क्या भाजपा और उनके परिवार के प्रवक्ता नहीं है। वो कह रहे हैं कि ये हमारा रोजमर्रा का काम है। इस चोरी को वो लोग रोजमर्रा का काम समझते हैं। बिना एफआईआर के जांच कैसे हो रही है? यहां तहरीर ही नहीं है? साधु, संतों की एसआईटी करे जांच
ट्रस्ट की ओर से तहरीर ही नहीं है। योगी आदित्यनाथ सीएम के निर्देशानुसार ये जांच हो रही है। जहां सीधे पीएमओ इंवाल्व हैं वहां ये अफसर क्या जांच रिपोर्ट देंगे, ये एसआईअी बिल्कुल बेकार, बोगस है। अगर जांच कराना है तो अयोध्या के संतों, चारों शंकराचार्यों की कमेटी बनाकर जांच कराएं। उसमें बेशक सरकार या ट्रस्ट का भी एक आदमी रख लिया जाए लेकिन तब उस एसआईटी से जांच कराई जाए। तब दूध का दूध पानी का पानी होगा। यूपी सरकार कागजों में गाय को पशु मानती है
कहा कि यूपी सरकार गाय को माता नहीं कह पाती, उसे अभिलेखों में पशु की श्रेणी में रखा है। जब आप मंचों से गाय को माता मानते हैं, माता कहते हैं तो उसे कागजातों में आप माता क्यों नहीं कह पा रहे हैं। कहा कि झूठ के पैर बहुत लंबे नहीं होते हैं। अभी न्यायालय में मामला लंबित है इसलिए हम ज्यादा बोल नहीं रहे हैं।

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